#CAMPAIGN: जिले के 250 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे है किराए के मकान में...आखिर कैसे सुधरें हालात

dinesh rathore

Publish: Jul, 14 2017 12:57:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
#CAMPAIGN: जिले के 250 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे है किराए के मकान में...आखिर कैसे सुधरें हालात

सरकारी सुविधाओं के अभाव में जिले के ढाई सौ आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में ही संचालित हो रहे हैं।

सरकारी सुविधाओं के अभाव में जिले के ढाई सौ आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में ही संचालित हो रहे हैं। इनके पास ना तो खुद की जमीन है और ना ही इन्हे कोई सरकारी भवन उपलब्ध कराया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बहुत कम किराया देने पर मकान मालिक भवन देने को तैयार नहीं है। एेसे में संचालित होने वाले केंद्र भी मजबूरी में किसी कोटड़ी या छोटी जगह पर चलाने पड़ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिले में 2031 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए केंद्र तो फिर भी किसी ना किसी सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं।  लेकिन, शहरी क्षेत्र में केंद्रों के लिए विभाग को कोई जमीन नहीं मिल रही है। शहर या कस्बों में केंद्र चलाने के लिए किराए के भवन का ही इस्तेमाल हो रहा है। किराए का भवन होने के कारण इन पर सुविधाओं का विस्तार करना भी विभाग के बस में नहीं हो पा रहा है। हकीकत यह है कि शहर प्रथम परियोजना में 148 व द्वितीय परियोजना में करीब 105 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों में हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले कई सालों से उन्हें किराए के नाम पर नाम मात्र की राशि दी जा रही है, जो मंहगाई के जमाने में नाकाफी है।




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महीने के मिलते हैं 750 रुपए


विभाग ने किराए का भवन लेने के लिए दो तरह की व्यवस्था कर रखी है। केंद्र के लिए शहर में किराए का मकान लेने पर प्रतिमाह 750 रुपए तय कर रखे हैं। वहीं कस्बे में किराए के भवन की राशि केवल 500 रुपए निर्धारित कर रखी है। महिला कार्मिकों का कहना है कि कम किराए की बात को विभागीय अधिकारी अनसुना कर देते हैं। 


परिषद नहीं दे रही स्थान


शहर द्वितीय परियोजना के सीडीपीओ सुरेश कुमार वर्मा ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए स्थान उपलब्ध कराने की खातिर नगर परिषद को लिखा हुआ है। लेकिन, अभी तक कोई स्थान चिंह्ति कर नहीं दिए गए हैं। यदि जगह मिल जाए तो भवन का निर्माण विभाग की ओर से कर दिया जाएगा। व्यवस्था के लिए विभाग की महिला पर्यवेक्षकों को भी पाबंद कर रखा है।


खुद के पैसों से लगाया पंखा


कैलाश नगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र 30-1 की कार्यकर्ता चंदा देवी ने बताया कि गर्मी सताने पर बच्चों के लिए खुद की जेब से पैसे खर्च कर पंखे की व्यवस्था की। लेकिन, अब मकान मालिक पंखा चलाने के बदले बिजली जलने की कीमत अलग से मांग रहे  हैं। नाम मात्र के मानदेय से बिजली का खर्चा हम कहां से दें। 

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