सीकर में दिनभर रहा किसानों में आक्रोश, शाम को आई राहत भरी खबर

Sikar, Rajasthan, India
सीकर में दिनभर रहा किसानों में आक्रोश, शाम को आई राहत भरी खबर

मध्यप्रदेश में हुई किसानों की मौत के बाद शेखावाटी के किसानों का गुस्सा भी फूट पड़ा।

मध्यप्रदेश में हुई किसानों की मौत के बाद शेखावाटी के किसानों का गुस्सा भी फूट पड़ा। शेखावाटी में किसानों ने सभा, सड़क जाम और महापड़ाव के जरिए सरकार को जमकर घेरा। हालांकि देररात समझौता होने के बाद किसानों ने पड़ाव हटा लिया। किसानों के गुस्से को देखते हुए जयपुर से दिनभर फीडबैक लिया जाता रहा। अखिल भारतीय किसान सभा के आह्मन पर  किसानों के लगभग 11 घंटे के आंदोलन के बाद सरकार ने राहत के कुछ छींटे गिराए। किसानों ने अब एेलान किया है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट व कर्जामाफी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों के आंदोलन के कारण मंडी में भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया। किसानों से समझौता वार्ता नहीं होने तक अधिकारियों की सांसे भी थमी रही। 




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भाजपा-कांग्रेस रही निशाने पर


सभा में पूर्व विधायक अमराराम ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के नेता पूरी मिले हुए है। उन्होंने कहा कि खान विभाग ने सीकर जिले के कांग्रेस नेता पर 273 करोड़ की पैनल्टी लगाई थी। लेकिन भाजपा सरकार ने कांग्रेस नेता की पैनल्टी माफ कर दी। 




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दोपहर बाद बढ़ी गई अधिकारियों की मुसीबत


किसानों की सभा में अधिकारियों की मुसीबत दोपहर बाद बढ़ती गई। दोपहर लगभग तीन बजे किसानों ने एेलान किया कि यदि प्याज की सरकारी खरीद शुरू नहीं होगी तो किसान कलक्ट्रेट की तरफ पैदल कूच करेंगे। इसके बाद जिला कलक्टर ने उच्च अधिकारियों को इस मामले से अवगत कराया। लेकिन मामला केन्द्र सरकार के पाले में होने के कारण जिला प्रशासन ने हाथ वापस खीच लिए। कलक्ट्रेट पहुंचने के बाद भी शाम को एकबार बात बनने की उम्मीद जगी। लेकिन वार्ता नहीं हो सकी। आखिर में रात नौ बजे समझौता वार्ता हुई और देररात को किसानों ने पड़ाव हटा लिया।





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इन मांगों पर बनी सहमति


किसानों के प्रतितिनिधमण्डल की रात नौ बजे जिला कलक्टर से बातचीत हुई। इसमें तय हुआ कि किसानों को मूंग का पैसा व बिजली के संशोधित बिल 30 जून तक जारी करवा दिए जाएंगे। प्याज खरीद के मामले में कलक्टर ने मुख्यमंत्री के पत्र का हवाला दिया। वहीं पशुक्रूरता के नाम पर पुलिस के परेशान करने के मामले में आगे इस तरह की कार्रवाई नहीं होने का आश्वासन दिया। जबकि अन्य मांगों के लिए सरकार को पत्र लिखने की बात कही गई।

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