तो हाईकोर्ट की भी नहीं सुनता ये विभाग, 21 साल में तीन बार आया फैसला, फिर भी कान में जूं तक नहीं रेंगी

dinesh rathore

Publish: Mar, 20 2017 10:30:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
तो हाईकोर्ट की भी नहीं सुनता ये विभाग, 21 साल में तीन बार आया फैसला, फिर भी कान में जूं तक नहीं रेंगी

शिक्षा विभाग से अपना हक पाने के लिए लडाई लडते-लडते पति जिन्दगी की जंग हार गया। पिछले 21 वर्ष से अब उसकी बेवा अपने पति के हक के लिए लड रही है।

शिक्षा विभाग से अपना हक पाने के लिए लडाई लडते-लडते पति जिन्दगी की जंग हार गया। पिछले 21 वर्ष से अब उसकी बेवा अपने पति के हक के लिए लड रही है। राजस्थान हाईकोर्ट व शिक्षा विभाग दोनों ने खुद माना है कि याचिकाकर्ता अपने हक के लिए पात्र है। इसके बादजूद विभाग केवल कागजी आदेश व आश्वासन थमा रहा है। लेकिन मदद के नाम पर एक फूटी कोडी भी नहीं दी। मामला है महरोली निवासी 72 साल की हवा कंवर का। हवा कंवर के पति बजरंग सिंह आर्मी में एनडीएसआई, पीटीआई ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत थे। 


1 मार्च 1973 में उन्हें राज्य सरकार में समायोजित कर दिया गया तथा उनके पद को पीटीआई ग्रेड द्वितीय की जगह पीटीआई ग्रेड तृतीय के समकक्ष रखा गया। अनके साथ समायोजित अन्य कर्मचारियों को 22 दिसम्बर 1975 को ग्रेड द्वितीय के समकक्ष कर दिया गया लेकिन बजरंग सिंह को ग्रेड तृतीय के समकक्ष ही रखा गया। मामले के चलते बजरंग सिंह ने 1994 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसका निर्णय 1997 में उनके पक्ष में आया लेकिन इससे पहले 11 फरवरी 1996 को 54 साल की उम्र में बीमारी के चलते बजरंग सिंह का निधन हो गया। तब से लेकर अब तक पति के बकाया भुगतान व पेंशन की फाईल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में घूम रही है। लेकिन हवा कंवर को आज तक मदद के नाम पर केवल सरकारी पत्र ही प्राप्त हो रहे है।



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हाईकोर्ट के निर्णय की नहीं हुई पालना


हाईकोर्ट का निर्णय वर्ष 1997 में बजरंग सिंह के पक्ष में आया लेकिन शिक्षा विभाग में निर्णय की पालना नहीं हुई। इस पर हवा कंवर ने दुबारा याचिका दायर की जिसका निर्णय 2012 में प्रार्थी के पक्ष में आया लेकिन शिक्षा विभाग में इसकी भी पालना नहीं हुई तो फिर से कन्टेम्प डाला गया जिसका निर्णय 2015 में प्रार्थी के पक्ष में आया लेकिन विभाग द्वारा आज तक ना तो हवां कंवर को पति के पीटीआई ग्रेड द्वितीय के परिलाभ मिले और ना ही हवा कंवर को तृतीय या द्वितीय ग्रेेड के मुताबिक पेंशन मिली। हवा कंवर को केवल एक हजार रुपए बेसिक के हिसाब से पेंशन मिलती आ रही है। 

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