बीमित किसान छह लाख, क्लेम मिला महज साढ़े छह हजार किसानों को, खबर में जाने पूरा मामला

Sikar, Rajasthan, India
बीमित किसान छह लाख, क्लेम मिला महज साढ़े छह हजार किसानों को, खबर में जाने पूरा मामला

सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए भले ही सरकार किसान को बीमित करने की योजना संचालित करे, लेकिन हकीकत यह है कि बीमा का प्रीमियम देने के बाद मृत्यु होने पर किसान के परिवार को सहकार का लाभ नहीं मिला रहा है।

सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए भले ही सरकार किसान को बीमित करने की योजना संचालित करे, लेकिन हकीकत यह है कि बीमा का प्रीमियम देने के बाद मृत्यु होने पर किसान के परिवार को सहकार का लाभ नहीं मिल रहा है। फसल बीमा की तरह किसान के व्यक्तिगत बीमा राशि के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हाल यह है कि जिले में एक अप्रेल 2009 से अब तक केवल 6500 किसानों को मृत्यु होने पर बीमा राशि का भुगतान किया गया है। हालांकि बीमित राशि के क्लेम की समयावधि तय है इसके बावजूद कई प्रकरण अभी बीमा कम्पनी के स्तर पर लम्बित है। एेसे में हजारों किसानों के क्लेम की फाइलें स्वीकृति का इंतजार कर रही है।


प्रीमियम जमा, फिर भी परेशानी


ग्राम सेवा सहकारी समिति के सदस्य किसान सहकार बीमा सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। प्रतिवर्ष बीमित होने वाले ये किसान प्रतिवर्ष प्रीमियम के रूप में करोड़ों रुपए जमा कराते हैं, मृत्यु के बाद बीमा राशि के लिए परेशानी होने से परिजन खासे आहत हो जाते हैं। प्रीमियम ऋण की राशि पर तय होता है।


ऐसे होती है परेशानी


ग्राम सेवा सहकारी समिति से किसान को बिना ब्याज का ऋण दिया जाता है। किसान की मृत्यु होने पर ऋण खाते में क्लेम की राशि नहीं आती है। खाते में ऋण की राशि के कारण बैंक ऋणी के परिवार से नौ प्रतिशत ब्याज लेता है। इससे आर्थिक रूप से टूट चुके किसान के परिवार को ब्याज भी देना पड़ता है।


यह है नियम


ग्राम सेवा सहकारी समिति किसान को फसली ऋण के रूप में 20 हजार से लेकर डेढ लाख रुपए तक का ऋण देती है। सहकारी बैंक का बीमा एजेंसी के साथ एमओयू होता है। इन किसानों का ऋण की राशि के हिसाब से बीमा किया जाता है। मृत्यु होने की स्थिति में दावा क्लेम करने के एक माह के दौरान कम्पनी की ओर से भुगतान नहीं करने पर नौ प्रतिशत ब्याज देने का प्रावधान है।


फैक्ट फाइल


प्रतिवर्ष के आंकडे अप्रेल से मार्च तक कुल आंकडे


वर्ष           बीमित    प्रीमियम  क्लेम मिला   क्लेम की रााशि

2009-10  48419  4156619       127         3659444

2010-11  75157   7823526       350        14143369

2011-12  79785   8491934       476        24252281

2013-14  96054   18429606     541        23482010

2014-15  103926 23992942     687        30556113

2015- 16 105366 34736975    2926       135985331

-स्त्रोत सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक

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इनका कहना है

क्लेम के प्रकरण में बैंक की तरफ से देरी नहीं की जाती है। बीमा के लिए संबंधित को दो माह में आवेदन करना होता है। कई बार देरी से मिले आवेदनों के कारण बीमा कम्पनी के साथ पत्राचार प्रक्रिया में समय लग जाता है। बीमा कम्पनी में आए आवेदनों की स्कू्रटिंग में देरी के कारण समस्या आती है। इसके अलावा कई बार मृत्यु प्रमाण पत्र की देरी के कारण भी क्लेम पारित नहीं होता है। कम्पनी को कई बार पत्र लिख दिए हैं। - एसके मीणा, एमडी सीकर केन्द्रीय सहकारी बैंक


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