11 दिन बाद भी लागू नहीं हो पाया जीएसटी का परफॉर्मा, आखिर कैसे होगा सरकार का सपना पूरा...

Sikar, Rajasthan, India
11 दिन बाद भी लागू नहीं हो पाया जीएसटी का परफॉर्मा, आखिर कैसे होगा सरकार का सपना पूरा...

एक वस्तु पर एक कर लागू करने का केन्द्र सरकार का सपना सीकर जिले में लागू नहीं हो पा रहा है।

एक वस्तु पर एक कर लागू करने का केन्द्र सरकार का सपना सीकर जिले में लागू नहीं हो पा रहा है। गुड्स सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू करने के 11 दिन बाद भी सीकर जिले में नए टैक्स फॉर्मेट से बिलिंग शुरू नहीं हो सकी है। हाल यह है कि कई कारोबारियों ने तो अब तक कम्प्यूटर बिल या बिल बुक तक नहीं छपवाई है। कई व्यापारी नए टैक्स के दायरे के अनुसार अपने सिस्टम अपग्रेड करने में लगे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन व्यापारियों को हो रही है जिनकी दुकान में अलग-अलग कर की दरों वाली वस्तुओं की बिक्री हो रही है। विभाग की माने तो 55 से 60 फीसदी व्यापारियों ने जीएसटीएन नम्बर ले लिए हैं लेकिन नए नियम समझने में नहीं आने से पुराने पेटर्न पर ही बिल दिए जा रहे हैं। जीएसटी एक जुलाई से पूरे प्रदेश में शुरू हुआ है।


इन पर सबसे अधिक प्रभाव...


ऑटो पार्टस

ऑटो पार्टस की प्रत्येक दुकान पर कई तरह के पाट्र्स की बिक्री होती है। इन पर कर की दर अलग- अलग है। एेसे में विक्रेता तय नहीं कर पा रहे हैं कि किस पर कितना कर लगना है। ऑटो पार्टस विक्रेताओं ने बताया कि ट्रैक्टर के पार्टस पर 18 प्रतिशत तो गाडिय़ों के पाट्र्स पर 28 प्रतिशत टैक्स है, लेकिन टायर पर कितना लगना है किसी को पता नहीं। इसके चलते अधिकांश दुकानदार बिल नहीं दे पा रहे हैं।





Read also:

प्रदेश का पहला एप, हिंदी में लिखो जीएसटी के सवाल, एप देगा जवाब...





दवा

जिले में दवा की 1500 से ज्यादा दुकानों पर अलग-अलग दरों की दवाएं बिकती है। अब तक महज 20 प्रतिशत दुकानदार ही नए फार्मेट के आधार पर बिल दे रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि मेडिकल दवा विक्रेता कंपोजिशन के दायरे में आ रहे हैं।रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है।


दाल-चावल

सीकर में दाल, चावल चीनी और तेल का रोजाना कारोबार करीब एक करोड़ से ज्यादा है। इसमें करीब 23 प्रतिशत बिक्री ब्रांडेड सामग्री की है। जिले में करीब 3000 से ज्यादा दुकानें संचालित होने के बावजूद अधिकांश ज्यादातर कारोबारियों ने तो अभी तक रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया।


कपड़ा

1000 रुपए से सस्ते कपड़े पर 5 प्रतिशत टैक्स है। 1000 रुपए से ज्यादा महंगे कपड़े पर 12 प्रतिशत टैक्स है। मुनाफे पर भी टैक्स लगना है। टर्नओवर के लिहाज से किसे जीएसटीएन नंबर लेना है, किसे नहीं? 


स्वर्णाभूषण

स्वर्णाभूषण से जुडे़ अधिकांश व्यापारियों को बिल का सही परफोर्मा ही नहीं पता है। वे अभी भी पुराने बिल में सील लगाकर काम चला रहे हैं।


गलत है...

जीएसटी के बिना बिल काटना गलत है। विभाग की ओर से व्यापारियों से समझाइश कर जीएसटी को पूरी लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द सफलता मिलेगी। -विक्रम सिंह बारहठ, उपायुक्त राज्य कर सीकर

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned