#Rajasthan : मंत्रियों के गृह जिला अस्पताल में नहीं है ये दवा

Sikar, Rajasthan, India
#Rajasthan : मंत्रियों के गृह जिला अस्पताल में नहीं है ये दवा

दोनों चिकित्सा मंत्रियों का गृह जिला और उसमें भी सबसे बडे़ सरकारी अस्पताल में खांसी की दवा पिछले छह महीनों से उपलब्ध नहीं रहना व्यवस्थाओं को आइना दिखाने के लिए काफी है।

दोनों चिकित्सा मंत्रियों का गृह जिला और उसमें भी सबसे बडे़ सरकारी अस्पताल में खांसी की दवा पिछले छह महीनों से उपलब्ध नहीं रहना व्यवस्थाओं को आइना दिखाने के लिए काफी है। जबकि सरकारी एसके अस्पताल में प्रतिदिन डेढ़ हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। उनमें ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग लोगों को खांसी से छुटकारा दिलाने के  लिए कफ सीरप डॉक्टर लिख रहे हैं। लेकिन, दवा काउंटरों पर कफ सीरप नहीं मिलने के कारण यहां आए रोगियों को दवा मजबूरन बाहर से खरीदनी पड़ रही है। 

बाकी निशुल्क मिलने वाली दवाइयों में भी कमोबेश यहीं स्थिति है। उपलब्ध रहने वाली 420 प्रकार की दवाइयों में केवल 200 के करीब ही दवा रोगियों को मिल रही है। जानकारी के अनुसार 2 अक्टूबर 2011 में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा वितरण योजना की शुरूआत की गई थी। जिसके तहत सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों में आने वाले मरीज को सर्वाधिक काम में आने वाली दवाइयां निशुल्क दी जानी थी। हालांकि योजना के शुरूआती तौर पर तो सरकार पूरी दवाइयां सरकारी दवा काउंटरों पर भिजवा रही थी। लेकिन, अब दवाइयों में सप्लाई की कटौती कर मरीजों की स्वास्थ्य सेवा को हल्के में लिया जा रहा है। हालात यह हैं कि जिला औषधि भंडार पर सप्लाई होने वाली दवाइयों की उपलब्धता 420 बताई जा रही है। जबकि एसके अस्पताल सहित जिले के 161 दवा वितरण केंद्रों पर इससे आधी दवाइयां भी मौजूद नहीं हैं। दवा के लिए रोगियों को एक से दूसरे काउंटरों पर चक्कर कटवाए जा रहे हैं। इधर, काउंटरों पर बैठे फार्मासिस्टों का तर्क है कि दवा की सप्लाई आगे से बाधित है। जो नहीं मिल रही उस दवा के नाम आगे सील लगाकर दे रहे हैं।  




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जांच योजना के भी बुरे हाल


एसके अस्पताल, ब्लड बैंक के बाहर लगे जांच योजना के फ्लेक्सी बोर्ड पर 41 प्रकार की जांच होने की सूचना अंकित की हुई है। लैब टेक्नीशियन संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इनके अलावा सरकार ने 36 तरह की जांच का प्रपोजल बना रखा है। जो कि, पीपीपी मोड पर की जाएगी। लेकिन, अभी तक उन जांचों को अभी लागू नहीं किया गया है। 




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अधिकारियों के तर्क भी अजीब


पीएमओ एसके शर्मा का कहना है कि दवा खरीदने के लिए पांच लाख का बजट स्वीकृत किया जा चुका है। कितनी तरह की दवाइयां खरीदी गई हैं। ये संबंधित बाबू ही बता सकते हैं। इधर, सीएमएचओ डा. एसएस अग्रवाल के अनुसार कफ सिरप कम आ रहे हैं। लेकिन, फिर भी संबंधित अधिकारियों को अलग से बजट देकर स्थानीय स्तर पर भी दवा खरीदने के अधिकार दे रखे हैं। दवा नहीं खरीदने के कारण पिछला बजट लेप्स भी हो गया था। यदि काउंटरों पर दवाइयां उपलब्ध नहीं है तो मामले को दिखवाया जाएगा। 

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