पति को खोया, बेटी को भी एचआईवी ने जकड़ा पर हिम्मत नहीं हारी

vishwanath saini

Publish: Dec, 01 2016 07:09:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
पति को खोया, बेटी को भी एचआईवी ने जकड़ा पर हिम्मत नहीं हारी

सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार कर घर से निकलना और सांझ ढले वापस घर लौटना। मानो यही जिंदगी का उदेश्य बन गया है। इस दौरान राधा मिलने वाले हर उस व्यक्ति और महिला को एड्स के प्रति जागरूक करती है।

ये दास्तां है एक एचआईवी पीडि़त महिला की। जिसने पहले तो एड्स से पीडि़त अपने पति को खो दिया। इसके बाद खुद इस जानलेवा रोग की चपेट में आ गई। लेकिन, बीमारी ने जब इनकी इकलौती बेटी को भी एचआईवी की गिरफ्त में ले लिया तो मन झकझोर उठा और निकल पड़ी जागरूकता की मशाल लिए औरों को इस पीड़ादायी बीमारी से बचाने के लिए। बस जिंदगी का अब एक ही मकसद है और वह है एचआईवी के प्रति जितने लोगों को जागरूक कर सके। वह करेगी।
जी हां, हम बात कर रहे हैं ठीकरिया बावड़ी की 35 वर्षीय महिला राधा (बदला हुआ नाम) जो कि, स्वयं एचआईवी पीडि़त है। लेकिन, अब लोगों के लिए रोशनी की किरण बनी हुई है।  सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार कर घर से निकलना और सांझ ढले वापस घर लौटना। मानो यही जिंदगी का उदेश्य बन गया है। इस दौरान राधा मिलने वाले हर उस व्यक्ति और महिला को एड्स के प्रति जागरूक करती है। जिसमें एड्स क्या है और कैसे इससे बचा जा सकता है। यदि भूलवश कोई इस रोग से ग्रसित हो गया है तो उसे इलाज संबंधी जानकारी देकर उसे एआरटी सेंटर तक लाने तक की जिम्मेदारी राधा स्वयं संभालती है। ताकि रोग से जो जख्म  राधा ने भुगते हैं वो किसी और को नहीं भुगतना पडे़। बतौर राधा का कहना है कि रोगी होने के बाद वह उधार की जिंदगी जी रही है। लेकिन, जब तक रोग से मौत के मुंह तक घसीट नहीं ले जाए। तब तक उसकी जंग जारी रहेगी और लोगों को इसकी गंभीरता बताते हुए बचाती रहेगी।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned