#सूदखोरी : सीकर में ऐसे लोगों की तलाश कर रही है पुलिस, 20 लोन माफिया के नाम पोर्टल पर

dinesh rathore

Publish: Apr, 19 2017 06:26:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
#सूदखोरी : सीकर में ऐसे लोगों की तलाश कर रही है पुलिस, 20 लोन माफिया के नाम पोर्टल पर

सीकर के सूदखोरों की कुण्डली अब पुलिस के पोर्टल पर भी नजर आएगी। इन सूदखोरों को पुलिस ने नाम दिया है ऋण माफिया। सट्टा और शराब माफिया की गैंगवार के साथ सीकर के अपराध क्षेत्र में अब नया नाम जुड़ गया है ऋण माफिया।

सीकर के सूदखोरों की कुण्डली अब पुलिस के पोर्टल पर भी नजर आएगी। इन सूदखोरों को पुलिस ने नाम दिया है ऋण माफिया। सट्टा और शराब माफिया की गैंगवार के साथ सीकर के अपराध क्षेत्र में अब नया नाम जुड़ गया है ऋण माफिया। सूदखोरी के कारोबार पर शिकंजा कसने में जुटी पुलिस ने अब तक 20 ऋण माफिया छांट लिए हैं। पुलिस इनके अपराधिक रिकार्ड के साथ संपत्ति का ब्योरा भी एकत्र करने में जुटी है। बाद में यह जानकारी हिस्ट्रीशीटर और गैंगवार के अपराधियों के साथ पुलिस के पोर्टल पर सार्वजनिक की जाएगी। जिससे लोग इनसे बचकर रहे और भविष्य में इन पर निगरानी और कार्रवाई में पुलिस को सहुलियत हो। हालांकि पुलिस ने अभी तक ऋण माफियाओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। सूदखोरों की संपत्ति की सूचना पुलिस की ओर से इनकम टैक्स विभाग और ईडी को भेजी जाएगी। पुलिस ने इस संबंध में दोनों विभागों से सम्पर्क भी कर लिया है। सूदखोरी के कई मामलों में पीडि़त से उसकी जमीन व जायदाद की बिक्री के रजिस्टर्ड दस्तावेज बनाने की बात सामने आई है। पुलिस की पूछताछ में सूदखोर पैसा ब्याज पर देने की बजाय जमीन को खरीदने की बात कह रहे हैं। एेसे में दोनों विभाग संपत्ति खरीदने के लिए आए पैसों के बारे में पूछताछ करेगी। ऋण माफिया गिरोह पर शिकंजा कसने के लिए अधिवक्ताओं की भी राय ली जा रही है। इसकी बड़ी वजह यह है कि पैसों का लेन-देन और सामान्य ब्याज सिविल अपराध की श्रेणी में आता है। ऋण माफिया गिरोह के लोग इसी का फायदा उठा रहे थे। पीडि़त के पैसे नहीं दे पाने की स्थिति में उसके खिलाफ चेक अनादरण का दावा कर दिया जाता। अपने हाथ कटे होने के कारण वसूली के लिए धमकी मिलने पर भी पीडि़त पुलिस के पास भी नहीं जा पाता। एेसे में पुलिस ने सूद से ज्यादा वसूली को अपराध का प्रमुख आधार माना है।




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अब लॉटरी और चेन सिस्टम आएंगे लपेटे में


सूदखोरी पर कार्रवाई के साथ पुलिस की नजर सीकर में रुपयों के लेन-देन को लेकर चल रहे लॉटरी और चेन सिस्टम पर भी पड़ गई है। पुलिस को पता चला है कि सीकर शहर व आस-पास के क्षेत्र में 30 से अधिक स्थानों पर इस तरह पैसों का कारोबार किया जा रहा है। इसमें किस्त के रूप में मोटी रकम पेनल्टी के रूप में वसूली जा रही है। जबकि साहूकारी लाइसेंस के बिना इस तरह का कारोबार नहीं किया जा सकता। जिले की स्थिति देखे तो महज एक लाइसेंस वर्ष 2005 में जारी किया गया था।




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छह से अधिक मामलों पर खुलेगी हिस्ट्रीशीट


सूदखोरी के अब तक 20 से अधिक मामले पुलिस में दर्ज हो चुके हैं। सूदखोर के खिलाफ छह से अधिक मामले दर्ज होने के बाद पुलिस उसकी हिस्ट्रीशीट भी खोलेगी।




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नामी-बेमानी संपत्ति और करोड़ों के वारे-न्यारे


पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि ऋण माफिया के रूप में छांटे गए लोगों की सीकर व आस-पास के क्षेत्र में करोड़ों की नामी-बेनामी संपत्ति है। गिरोह से जुड़े कुछ लोग तो एेसे हैं जो कुछ वर्ष पहले ठेला लगाकर जीवन यापन करते थे, लेकिन यह कारोबार शुरू करने के बाद आज उनके सीकर शहर में दस से अधिक मकान हैं। इसके अलावा कई जमीनों में भी उनकी हिस्सेदारी है। कुछ लोग केवल सट्टा करने वाले को ही दस से तीस फीसदी सूद पर पैसा देते थे। इसके लिए पैसा दिलवाने, कागजी कार्रवाई करने और दबाव बनाने की जिम्मेदारी गिरोह में अलग-अलग लोग संभालते थे।



विशेष टीम जुटी जांच में


ऋण माफिया सीकर में गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं। इनकी जांच के लिए विशेष टीम को लगाया गया है। ऋण माफियाओं की जानकारी पुलिस के पोर्टल पर भी अपलोड की जाएगी। साथ ही गिरेाह के लोगों की हिस्ट्रीशीट भी खोली जाएगी।


अखिलेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, सीकर

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