#सूदखोरी: अरे ये क्या! सीकर में 324 लोग कर चुके हैं आत्महत्या, ये वजह जानकर हो जाओगे परेशान

Sikar, Rajasthan, India
#सूदखोरी: अरे ये क्या! सीकर में 324 लोग कर चुके हैं आत्महत्या, ये वजह जानकर हो जाओगे परेशान

सूदखोरों से परेशान होकर मलकेड़ा गांव में रमेश स्वामी और उसकी पत्नी संपत्ती ने ही नहीं, इससे पहले भी जिले में सूद और ब्याज कई लोगों की मौत का कारण बना है। हर दूसरे दिन यहां कोई ना कोई मौत को गले लगा रहा है।

सूदखोरों से परेशान होकर मलकेड़ा गांव में रमेश स्वामी और उसकी पत्नी संपत्ती ने ही नहीं, इससे पहले भी जिले में सूद और ब्याज कई लोगों की मौत का कारण बना है। हर दूसरे दिन यहां कोई ना कोई मौत को गले लगा रहा है। पुलिस के आंकड़े चीख उठाने वाले हैं। पिछले दो वषज़् में आत्महत्या के 324 मामले दर्ज हुए हैं। यह तो मामलों की स्थिति है। आत्महत्या करने वालों की संख्या इनसे कहीं ज्यादा है। बड़ी वजह है आर्थिक तंगी और कर्ज। व्यापार में घाटे के बाद आदमी सूदखोरों के चंगुल में फंस जाता है। इसके बाद इससे निकलने का उसके पास कोई रास्ता नहीं बचता। अंत होता है मौत। जो परिवार के लिए कभी ना भूलने वाला भयावह मंजर बन जाता है।




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गहरा है दर्द


आर्थिक परेशानी के चलते मौत को गले लगाने का दर्द गहरा है। खरेटा की ढाणी का किशनलाल बलाई, रामगढ़ के सुनील कुमार, गोरधन, पवन, रूकनसर के सतपाल, गिरधारीलाल, गोपाल, बलोद बड़ी के रिछपाल और रामसीसर के बनवारी ऐसे नाम है जिनकी मौत की वजह पुलिस की जांच में आर्थिक परेशानी सामने आई है। इनमे से किसी ने रेल से कटकर तो किसी ने जहर और किसी ने फंदे पर लटकर जान दी है।




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जांच में पुलिस नहीं बरतती गंभीरता


आत्महत्या के मामलों में पुलिस भी जांच में गंभीरता नहीं बरतती है। अधिकतर मामलों में पुलिस की भूमिका पंचनामा और पोस्टमार्टम करवाने तक ही होती है। परिवार भी पुलिस को स्थिति बयां करने की स्थिति में नहीं होता है। सुसाइड नोट मिलने पर भी सब का प्रयास मामले को दबाने का ही होता है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस में दर्ज 324 मामलों में से 114 में पुलिस ने जांच में कारण अज्ञात है।




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जड़ से खत्म करने का प्रयास...


सीकर पुलिस का प्रयास सूदखोरी के कारोबार को जड़ से खत्म करने का है। मलकेड़ा में दंपत्ती की मौत के बाद पुलिस अभियान के रूप में सूदखोरों के खिलाफ  कार्रवाई कर रही है। सूदखोरी का काम करने वाले लोगों को सूचीबद्ध कर लिया गया है। जिला पुलिस उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। जल्द ही प्रयास रंग लाएंगे।

अखिलेश कुमार, पुलिस अधीक्षक, सीकर





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कम हो रही सहनशक्ति ...


आत्महत्या की बड़ी वजह आर्थिक तंगी है। इससे उबरने के प्रयास व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है। कर्ज के साथ सूद चुकाने का दबाव परेशानी में डाल देता है। ऐसे व्यक्ति किसी को कुछ नहीं पाता और उसकी सहनशक्ति कम हो जाती है। फेल्योर होने पर भी व्यक्ति आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। जब व्यक्ति को नींद आना बिल्कुल कम हो जाए हर समय नकारात्मक बात करने लग जाए तब ऐसा कदम उठा लेता है।

डॉ. बी.डी. मील, मनोचिकित्सक

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