पत्नी के हौसले का इम्तिहान ले रही गरीबी

dinesh rathore

Publish: Apr, 12 2017 05:42:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
पत्नी के हौसले का इम्तिहान ले रही गरीबी

उसकी डबडबाई आंखें शून्य की तरफ ताकती रहती हैं...। हर आहट पर आंखों की पुतलियां चौड़ी हो जाती हैं, इस आस में की दरवाजे पर कोई फरिश्ता आया हो मददगार बनकर...।

तारपुरा से जोगेंद्रसिंह गौड़

उसकी डबडबाई आंखें शून्य की तरफ ताकती रहती हैं...। हर आहट पर आंखों की पुतलियां चौड़ी हो जाती हैं, इस आस में की दरवाजे पर कोई फरिश्ता आया हो मददगार बनकर...। आंखों में बच्चों के सपने तो हैं, पर मुफलिसी हौसले का इम्तिहान ले रही है। चूल्हे पर खाली पतीली उसकी गरीबी को बयां करती है। पत्नी का संघर्ष उसे आत्मशक्ति तो देता है, पर महंगे इलाज के आगे वह बेबस है। मदद की आस में उसने हर दर पर मत्था टेका, पर दुख की इस घड़ी में मानों उसका राम भी उससे रूठ गया हो। हम बात कर रहे हैं तारपुरा निवासी राजेंद्र की। 

प्रशासन ने नहीं की मदद

गांव वालों के अनुसार राजेंद्र की स्थिति देखकर वे लोग भी मदद के लिए आगे आए थे। कुछ पैसा जोड़कर इलाज के लिए दिया था। लेकिन, अब बार-बार जयपुर जाने के लिए किराए की कमी खल रही है। फिलहाल, राजेंद्र को मदद की दरकार है, पर प्रशासन भी उसकी मदद नहीं कर रहा है। 

इलाज के पैसे नहीं, पत्नी करती है मजदूरी

सड़क हादसे के बाद से राजेंद्र की जिंदगी सालभर से पलंग पर ही गुजर रही है। बाइक से गिरने के बाद उसका एक हाथ और पैर खराब हो गया है। 26 वर्षीय राजेंद्र का कहना है कि मजदूरी कर वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। लेकिन, सालभर पहले बाइक से गिरने के बाद उसका पूरा शरीर जख्मी हो गया। यहां इलाज के लिए मना कर दिया तो उसने जयपुर उपचार करवाया। वहां उसके हाथ और पैर में राड़ डाल दी गई और बाकी इलाज के लिए जयपुर बुलाने लगे। एक साल इलाज के लिए जयपुर जाता रहा। रोजी रोटी छूट गई तो आर्थिक तंगी ने जकड़ लिया। अब हालत यह हो गई है कि बाकी के उपचार के लिए जयपुर जाने तक का किराया परिवार के पास नहीं बचा है। मजबूरी में पत्नी रंजना मजदूरी करने जाने लगी है। मजदूरी से मिला कुछ पैसा पेट की भूख शांत करने में लग जाता है। कुछ रुपए उपचार और 

जयपुर आने-जाने के लिए जोड़ा जा रहा है।

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