सरकारी अस्पताल में दोपहर दो बजे बाद नहीं लगेगा रेबीज इंजेक्शन, आप भी पढ़ें हाल-ए-एसके अस्पताल...

dinesh rathore

Publish: Jul, 14 2017 03:06:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
सरकारी अस्पताल में दोपहर दो बजे बाद नहीं लगेगा रेबीज इंजेक्शन, आप भी पढ़ें हाल-ए-एसके अस्पताल...

आनंद नगर निवासी शुभम वर्मा गुरुवार को कोचिंग करने गया था। इस दौरान एक पालतू श्वान ने उसे काट लिया। परिजन उसे लेकर एसके अस्पताल की ट्रोमा यूनिट पहुंचे।

आनंद नगर निवासी शुभम वर्मा गुरुवार को कोचिंग करने गया था। इस दौरान एक पालतू श्वान ने उसे काट लिया। परिजन उसे लेकर एसके अस्पताल की ट्रोमा यूनिट पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने इंजेक्शन रूम बंद होने के बाद शुभम को एंटी रेबीज और टेटनस का इंजेक्शन नहीं लगाया। बाद में परिजनों के विरोध को देखते हुए एंटी रेबीज की डोज व टेटनस का इंजेक्शन लगाया गया। 

इस प्रकार की परेशानी अस्पताल में दोपहर दो बजे बाद आने वाले मरीजों के साथ हो रही है। श्वान, बंदर, बिल्ली या छोटे बडे़ कीडे़ के काटने के 24 घंटे में एंटी रेबीज की पहली डोज लेना जरूरी है लेकिन जिले के सबसे बडे कल्याण अस्पताल में दोपहर दो बजे बाद एंटी रेबीज का इंजेक्शन नहीं मिलता है। रही सही कसर ट्रोमा यूनिट में एंटी रेबीज के इंजेक्शन नहीं रखने से हो रही है। इधर नर्सिंग कर्मचारियों ने बताया कि एंटी रेबीज की एक वायल में छह डोज आती है। एक व्यक्ति को लगाने पर पांच डोज छह घंटे बाद बेकार हो जाती है। एेसे में अधिकांश मामलों में पांच रोगी एक साथ आने पर डोज का इस्तेमाल किया जाता है।  





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नर्वस सिस्टम के लिए घातक


रेबीज एक एेसा वायरस होता है जो बरसों तक पीडित के शरीर में सुप्तावस्था में रह सकता है। बरसों बाद रेबीज का असर नजर आता तो चिकित्सक भी कुछ नहीं कर पाते हैं। किसी जानवर के काटने के 24 घंटे के अंदर ऐंटी -रेबीज टीकों के जरिए इलाज करना जरूरी है। । चिकित्सकों ने बताया कि रेबीज का वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है, जिससे पीडि़त सामान्य नहीं रह पाता। बाद में तेज दर्द में चीख-पुकार मचाते हुए मरीज की मौत हो जाती है।  

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