विश्व जनसंख्या दिवस आज: इनकी बेटियां है बेटों से भी बढ़कर, पढ़ें विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष...

Sikar, Rajasthan, India
विश्व जनसंख्या दिवस आज: इनकी बेटियां है बेटों से भी बढ़कर, पढ़ें विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष...

डॉक्टर हो या इंजीनियर या फिर कोई शिक्षक हो या सिपाही। सभी ने एक कदम आगे आकर परिवार नियोजन को महत्व दिया है।

डॉक्टर हो या इंजीनियर या फिर कोई शिक्षक हो या सिपाही। सभी ने एक कदम आगे आकर परिवार नियोजन को महत्व दिया है। सभी ने बेटे की चाह भुलाकर बेटियों में ही सच्चे व सुखी परिवार का मोल समझा है। बानगी यह है कि दो बेटियों पर परिवार नियोजन अपना रखा है।




बेटियां समझती हैं जिम्मेदारी



गोकुलपुरा निवासी साबूलाल चौधरी आर्मी में सिपाही थे। वर्तमान में सैनिक कल्याण विभाग में कल्याण संघटक के तौर पर पदस्थापित हैं। साबूलाल चौधरी के दो बेटियां सुप्रिया व अभिलाषा चौधरी हैं। इनमें एक बीटेक कर रही है और एक कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। बतौर साबूलाल का कहना है कि बेटों के बजाय बेटियां घर की जिम्मेदारी ज्यादा अच्छे से समझती हैं। यहीं वजह है कि बेटियां होने के बाद बेटे का मोह ही खत्म हो गया।




बेटियों ने सच कर दिखाया सपना


पिपराली रोड जाट कॉलोनी निवासी परमेश्वरलाल जो कि शिक्षक हैं। इनके भी दो बेटियां ही हैं। इसके बाद इन्होंने भी परिवार नियोजन को ही बेहतर समझा। इनमें एक बेटी नीतू चौधरी जो कि पीएचईडी में एईएन है और दूसरी निकिता नगर परिषद में अकाउंटेंट है। परमेश्वर और इनकी पत्नी विनोद देवी ने बताया कि दोनों बेटियों ने नौकरी पाकर हमारा सपना पूरा कर दिखाया है। बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं होती हैं।




प्रतिवर्ष होते हैं 12 हजार ऑपरेशन



जिले में प्रतिवर्ष नसबंदी के 11 से 12 हजार ऑपरेशन होते हैं। इसके अलावा अस्थाई साधनों के उपयोग से दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट आई है। जो कि, जिले के लिए अच्छे संकेत हैं। 2001 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 22,87788 थी। जो कि, वर्ष 2011 में 26,77737 ही रही। 2001 में दशकीय वृद्धि दर 24.11 फीसदी थी। वह 2011 में 17.04 प्रतिशत ही रही। सीएमएचओ डा. विष्णु मीना व परिवार कल्याण के एडिशनल सीएमएचओ डा. बृजमोहन जाखड़ ने बताया कि विश्व जनसंख्या दिवस पर 11 जुलाई को सुबह आठ बजे एसके अस्पताल से जागरूकता रैली निकाली जाएगी। इसके बाद 10.30 बजे रेलवे सामुदायिक भवन में परिवार नियोजन में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान किया जाएगा। 11 जुलाई से 24 जुलाई तक जनसंख्या स्थायित्व पखवाड़ा मनाया जाएगा।




दो घर संवारती है बेटी


कुड़ली निवासी ताराचंद ओला कम्प्युटर इंजीनियर हैं। इन्होंने भी हर्षिता व संचिता दोनों बेटियों के जन्म के बाद परिवार नियोजन को प्राथमिकता दी। एक बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और दूसरी कक्षा 10 में है। ओला के अनुसार बेटियां एक नहीं बल्कि दो घरों को संवारने का काम करती है। जबकि बेटा बड़ा हो जाने पर जन्म देने वाले माता-पिता को ही भूल जाता है।





अनमोल होती हैं बेटियां 

महेश सचदेवा जो कि डॉक्टर हैं। इन्होंने भी दोनों बेटियां ऋतिका व श्रेया है। इनमें एक आईआईटी तो दूसरी कक्षा नौ में पढ़ रही है। इनका मानना है कि बेटियां अनमोल होती हैं। एेसे में परिवार नियोजन को अपना लिया। बेटा व बेटियों में कोई फर्क नहीं होता है। बेटियां तो घर की जान होती हैं।

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