आचार्य सुकुमालनंदी ने कहा-'धन के चक्कर में अपनों में बढ़ रही दूरी...'

Sikar, Rajasthan, India
आचार्य सुकुमालनंदी ने कहा-'धन के चक्कर में अपनों में बढ़ रही दूरी...'

देवीपुरा सीकर स्थित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मन्दिर के समीप पाण्डूकशिला ग्राउण्ड में बुधवार को आचार्य सुकुमालनंदी का 24वां मुनि दीक्षा जयन्ती महोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया।

देवीपुरा सीकर स्थित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मन्दिर के समीप पाण्डूकशिला ग्राउण्ड में बुधवार को आचार्य सुकुमालनंदी का 24वां मुनि दीक्षा जयन्ती महोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के तत्पश्चात श्री 64 रिद्धि महामंडल विधान की संगीतमय पूजा की गई। दोपहर में आचार्य का दीक्षा जयंती समारोह मनाया गया। शोभायात्रा के बाद समारोह स्थल पर सर्वप्रथम जैन समाज एवं विभिन्न संस्थाओं के सदस्यों ने आचार्य की पूजा की व अर्घ चढ़ाया गया। मंगल कलश से आचार्य का प्रकट होना आकर्षण का केन्द्र रहा। मशीन से पुष्प वर्षा की गई। 1024 दीपकों से चिरंजीलाल ओमप्रकाश कासलीवाल परिवार ने महाआरती की। 



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आचार्य ने कहा कि इंसान आज धन-दौलत के चक्कर में अपनों से दूर होता जा रहा है। हमारे अंदर कभी अहंकार नहीं आना चाहिए। समारोह में पदमचंद पिराका, महावीरप्रसाद लालास, बालचन्द पहाडिय़ा, महेश काला, माणकचंद जयपुरिया, विमल बिनायक्या सहित जैन समाज के अनेक लोग मौजूद थे।राजेश पहाडिय़ा ने बताया कि नांवासिटी (नागौर) में 29 अगस्त 1978 को जन्मे सुकुमालनंदी ने मात्र 13 वर्ष की आयु में गृहत्याग कर  दिया था। 14 वर्ष में भीलवाड़ा में क्षुल्लक दीक्षा तथा 15 वर्ष में मालपुरा (टोंक) में मुनि दीक्षा ली। 9 मई 2004 में उपाध्याय पद और 13 फरवरी 2005 को कुंथुगिरि में आचार्य पद मिला। 

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