शेखावाटी में ताइवान की इस फसल ने मचाया 'गदर', किसानों को खूब भा रही ये फसल

dinesh rathore

Publish: May, 20 2017 12:15:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
शेखावाटी में ताइवान की इस फसल ने मचाया 'गदर', किसानों को खूब भा रही ये फसल

जिले में किसानों को 'ताइवानी पपीताÓ खूब भा रहा है। जिले के करीब 150 हेक्टेयर में ताइवान के पपीते के बाग लगे हुए है। देसी पपीते की तुलना में टिकाऊ और मीठा होने के कारण इसका आसानी से दूसरे राज्यों व विदेशों में परिवहन हो सकता है।

जिले में किसानों को 'ताइवानी पपीताÓ खूब भा रहा है। जिले के करीब 150 हेक्टेयर में ताइवान के पपीते के बाग लगे हुए है। देसी पपीते की तुलना में टिकाऊ और मीठा होने के कारण इसका आसानी से दूसरे राज्यों व विदेशों में परिवहन हो सकता है। वहीं सामान्य पपीते से अधिक भाव मिलने के कारण लोगों का इसकी बुवाई के प्रति रूझान बढ़ा है। इस समय धोद, लोसल, श्रीमाधोपुर, चौमूं, चूरू, नागौर जिले में ताइवानी पपीते से उत्पादन लिया जा रहा है।







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1 पेड़ से क्विंटल उत्पादन


एक पेड़ से एक क्विंटल तक उपज मिल जाती है। थोक भाव देसी किस्म के पपीते से चार से पांच रुपए प्रति किलो ज्यादा होते हैं। साथ ही अधिक मिठास होने के कारण जूस की दुकान वाले भी इसे खरीदने में तरजीह दे रहे हैं।







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बिना रसायन तैयार


रामपुरा गांव के राजकुमार मुवाल ने बताया कि अपने खेत में तीन बीघा से अधिक पौधे लगाए हैं। ताइवान के हाइब्रिड बीज रेड लेडी 786 बीज बुवाई की जाती है। दो लाख 60 हजार रुपए प्रति किलो के इस बीज मेें 95 प्रतिशत तक अंकुरण है। पौधा लगाने के नौ माह बाद उपज देना शुरू कर देता है। बिना रासायनिक उर्वरक व कीटनाशी के तैयार इस पेड़ पर ही पपीता पकता है।


इसमें लाल रंग व मिठास अधिक होती है। किसानों का इसकी बुवाई के प्रति रूझान बढ़ा है। हरलाल सिंह, उपनिदेशक उद्यान खंड

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