आज पापा बोलते क्यों नहीं...

rajendra denok

Publish: Apr, 13 2017 09:40:00 (IST)

Sirohi, Rajasthan, India
आज पापा बोलते क्यों नहीं...

पिता के शव को देख उनकी बेटियां मां से पूछने लग गईं कि..पापा से बोलो कि उनकी गुडिय़ा बुला रही है...ये बोलते क्यों नहीं। बच्चों के करुण क्रंदन से लोगों की भी आंखें नम हो गईं। बच्चे शव ले जाने से रोकते दिखे। पापा को पुकारते बच्चों को संभालना भारी हो गया।

रायपुर (छत्तीसगढ़) के होटल में आग से काल कवलित हुए व्यापारियों के शव बुधवार को उनके गांवों में पहुंच गए। दोपहर में इनके अंतिम संस्कार में जनसमूह उमड़ पड़ा। गांवों में माहौल गमगीन रहा, जिससे कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। परिजनों की चीत्कार से लोगों की रूलाई फूट पड़ी। लाज शिवगढ़ में अर्थी पर दलपतसिंह के शव को देख बेटा बार बार यही कहता रहा कि आज पापा बोलते क्यों नहीं..प्लीज एक बार बोल दो। वीरवाड़ा में पिता के शव को देख उनकी बेटियां मां से पूछने लग गईं कि..पापा से बोलो कि उनकी गुडिय़ा बुला रही है...ये बोलते क्यों नहीं। बच्चों के करुण क्रंदन से लोगों की भी  आंखें नम हो गईं। बच्चे शव ले जाने से रोकते दिखे। पापा को पुकारते बच्चों को संभालना भारी हो गया। अब उनके पापा वापस नहीं आएंगे, ऐसा बताने वाला तो दूर मुंह से बोल निकालने तक की किसी में हिम्मत नहीं थी। भटाणा में पोपटभाई लोहार की अंतिम यात्रा में विधायक जगसीराम कोली ने भी शिरकत की तथा परिजनों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। झाड़ोली में प्रवीण पुरोहित, वीरवाड़ा में फूलाराम माली व लाज शिवगढ़ में दलपतसिंह का अंतिम संस्कार किया गया।
हे भगवान! ये क्या हो गया..
सभी मृतक मिलनसार व्यक्तित्व के धनी एवं सरल स्वभाव के थे। ऐसे में शव पहुंचने के साथ ही गांवों में शोक की लहर छा गई। घरवालों से अब तक मौत का समाचार भी काफी हद तक छुपाए रखा था, लेकिन बुधवार को शव पहुंचते ही परिजनों पर मानों वज्रपात गिर गया। मृतकों के घर समाज के लोगों सहित अन्य लोग एकत्र होने लगे। हरेक की जुबां पर एक ही बात थी, हे भगवान यह क्या हो गया।
बूढ़े पिता बोले- अभी उठेगा और बोलेगा...लो मैं आ गया
पिण्डवाड़ा . झाड़ोली में प्रवीण पुरोहित का शव घर पहुंचा तो बुजुर्ग माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। पड़ोसी सांत्वना दे रहे थे लेकिन आंखें शून्य में खोई नजर आर्इं। वे बार-बार यही पूछते रहे कि बेटे को क्या हो गया।अभी कुछ दिनों पहले ही वह मां हिंगलाज के दर्शनार्थ पैदल यात्रा में सम्मिलित हुए थे और खुशहाली की मन्नत मांग कर मुम्बई गए थे। पिता बोले, उसे कुछ नहीं हो सकता। अभी उठेगा और बोलेगा-लो मैं आ गया। बेटा-बेटी इंतजार करते दिखे कि अभी उठेंगे और सिर पर हाथ फिरा कर लाड़ लड़ाएंगे। इन दृश्यों को देखकर लोगों की आखें नम हो गईं। परिजनों के अविरल अश्रुधार बहती रही। मिलनसार व्यक्तित्व के कारण सोशल मीडिया परश्रद्धांजलि संदेशों की झड़ी लगी हुई है।
बेटियां बोलीं-सबकुछ लुट गया
वीरवाड़ा निवासी फूलाराम माली का शव जैसे ही उनके गांव पहुंचा तो उनके दर्शन को वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सरल स्वभाव के धनी फूलाराम की चार बेटियों को भरोसा ही नहीं हो रहा था कि अब उनके पिता नहीं रहे। छोटी बेटियां यह कहती रहीं कि आज हमारे घर में इतनी भीड़ कैसे है। सबसे बड़ी बेटी को जब आभास हुआ तो उसने बहिनों को बांहों में भींच लिया और दहाड़े मार कर रोने लग गई। बोली-सब कुछ लुट गया रे छोटी... हम बर्बाद हो गए...। बेटियों का करुण-क्रंदन सुन आसपास के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। फूलाराम के अस्सी वर्षीय पिता मंछाराम माली को तो जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि अब उनका बेटा नहीं रहा। वे बार-बार यह कहते रहे कि मेरा बेटा मुझे छोड़कर नहीं जा सकता। 
जिंदादिल इंसान कभी मर नहीं सकते
सरूपगंज . लाज शिवगढ़ निवासी दलपतसिंह पुत्र देवीसिंह सिसोदिया का शव देख हर आंख से अश्रुधारा बहने लगी। उसकी पत्नी व परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हर कोई उन्हें संभालने में लगा था। अंतिम यात्रा में सैकड़ों की तादाद लोग शामिल हुए। लोग यह कहते सुने गए कि इतनी कम उम्र में कोई आदमी कैसे जा सकता है।  दलपतसिंह जैसे जिन्दा दिल इंसान तो कभी मर ही नहीं सकते।रायपुर से सड़क मार्ग से उदयपुर होते हुए शव शिवगढ़ लाया गया।
दलपतङ्क्षसह के बेटे कुलदीपसिंह यह कहते रहे कि मेरे पापा आज बोलते क्यों नहीं... इन्हें कुछ नहीं हो सकता। परिजन तीनों पुत्रों को बड़ी मुश्किल से ढांढ़स बंधा रहे थे। गांव में हर तरफ गमगीन माहौल था, कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। लोगों में चर्चा रही कि कम उम्र में चले जाने से परिवारजन सदमा कैसे सहन कर पाएंगे।
कैसे बिताएगी वैधव्य?
भटाणा . रायपुर से पोपटलाल लोहार का पार्थिक शरीर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।उनकी पत्नी जोशना देवी इस सूचना के बाद से सुधबुध खो चुकी है।रोना तो दूर घर आने वाले लोगों को भी रोने से मना कर रही है।बार-बार घर की दहलीज तक जाकर लौटती है और कहती है ये इतनी भीड़ क्यों हैं। मेरे पति को कुछ नहीं हुआ है। उसे उम्मीद है यह खबर झूठी है तथा पति अभी आएंगे। सदमा सहन नहीं कर पा रही जोशना देवी थोड़े-थोड़े अंतराल में बेहोश होती रही। उसका उपचार भी चालू है।
बेटी बोली- पापा नहीं ले जाने दूंगी
जैसे ही पोपटलाल का पार्थिक शव उनके घर पहुंचा, दोनों बेटे व बेटियों का रोना देखा नहीं गया। अन्तिम यात्रा शुरू होते ही बड़ी बेटी रोती हुई कहने लगी मेरे पापा को कहां ले जा रहे हो, पापा को मत ले जाओ, मैं उन्हें ले जाने नहीं दूंगी। मृतक की मां का हाल भी बुरा है। वृद्धावस्था में जवान बेटा साथ छोड़कर चला गया। पोपटलाल का अद्र्ध जला शरीर देखकर मां के आंखू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

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