श्रीमद्भागवत: भाव कुभाव अनख आलसहूं । नाम श्रपत मंगल दिसी दसहूं।।

Sonakshi Jain

Publish: Jul, 16 2017 04:31:00 (IST)

Sri Ganganagar, Rajasthan, India
श्रीमद्भागवत: भाव कुभाव अनख आलसहूं । नाम श्रपत मंगल दिसी दसहूं।।

बीरमाना में चारो तरफ छाया हुआ है धार्मिक माहौल। लोगो को बताया जा रहा है मुक्ति पाने का तरीका।

गांव के शिवालय में श्रीमद्भागवत कथा रविवार को भी जारी रही। तीसरे दिन कथावाचक आचार्य श्री सांवरिया जी ने बताया कि कलिकाल में भगवान ही मुक्ति का एक मात्र साधन है। ध्रुव प्रह्लाद इत्यादि अनेकों भक्त तथा अजामिल जैसे पापी भी भगवान नारायण के नाम से मुक्ति प्राप्त करते है।भगवान का नाम कैसे भी लिया जाये कल्याण ही करता है।


पूनिया जिला आबकारी अधिकारी, सीता सूरतगढ़ एसडीएम


लेकिन संसार की विडम्बना है कि सांसारिक मनुष्य सुख में तो भगवान को भूल जाता है।ओर दु:ख में याद करता है। लेकिन 'लेकिन सुख मे सुमरिन सब करे, दु:ख में करे ना कोई, जो सुख में सुमरिन करे, दु:ख काहे को होई। जैसे दोहे सुनाकर पण्डाल में बैठे श्रद्धालुओ का मन मोह लिया। इस श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार आज समुद्र मंथन, वामन अवतार, राम अवतार तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्रागरय उत्सव की कथाएं होगी।

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