जन सुरक्षा अधिनियम के तहत 4 नक्सलियों को 18 साल की सजा

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जन सुरक्षा अधिनियम के तहत 4 नक्सलियों को 18 साल की सजा

दरभा थाने से करीब 16 किलोमीटर के फासले पर उरुखपाल से बाडऩपाल की ओर जाने वाली सड़क पर चार संदिग्ध व्यक्ति नजर आए। पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो वे भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया।

छत्तीसगढ के बस्तर जिले में पहली बार छग विशेष जन सुरक्षा अधिनियम के तहत दोष सिद्ध पाते हुए सत्र न्यायालय ने चार नक्सली आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में 18 साल की सजा सुनाई है। साथ ही सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।




न्यायालय में विचारण के बाद सत्र न्यायाधीश एसके सिंह ने इन चारों आरोपियों को दोषी पाए जाने पर 18 साल की सजा के साथ एक-एक हजार रूपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार दरभा से दुर्गेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस की टीम उरुखपाल की ओर निकली थी। 




इस बीच दरभा थाने से करीब 16 किलोमीटर के फासले पर उरुखपाल से बाडऩपाल की ओर जाने वाली सड़क पर चार संदिग्ध व्यक्ति नजर आए। पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो वे भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। तो वहीं शिनाख्त के बाद 25 वर्षीय आयतू मंडावी जो नक्सलियों के संगठन डीएकेएमएस का अध्यक्ष बताया गया है।




साथ ही पुलिस ने आयतू मंडावी के अलावा बाकी पकड़े गए लोगों के नाम जनमिलिशिया कमांडर मुका कश्यप, चेतना नाट्य मंडली का कमांडर आयता मंडावी और चेतना नाट्य मंडली के सदस्य 22 साल के हुंगाराम मंडावी के रुप में की है। जहां मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत न्यायालय में मामला प्रस्तुत किया।

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