Campaing ; सपने पूरे कर रहे सैकण्ड हैण्ड वाहन

Tonk, Rajasthan, India
Campaing ; सपने पूरे कर रहे सैकण्ड हैण्ड वाहन

आजकल बाजार में वाहनों की बढ़ती कीमतों के कारण सैकण्ड हैण्ड वाहन खरीदने का प्रचलन बढ़ रहा है।

टोंक. हर इंसान का सपना होता है कि उसकी खुद की कार-बाइक हो, लेकिन बढ़ती महगांई के इस दौर में मध्यमवर्गीय परिवार के लिए  शो-रूम से नया वाहन लेना आसान नहीं होता। जैसे-तैसे कार बाजार से सैकण्ड हैंड वाहन लेकर अपनी इस जरूरत को पूरा कर लेता है। यही कारण है कि आजकल बाजार में वाहनों की बढ़ती कीमतों के कारण सैकण्ड हैण्ड वाहन खरीदने का प्रचलन बढ़ रहा है। 


कार बाजार से जुड़े कारोबारी कमल कुमार ने बताया कि पहले सैकण्ड हैण्ड वाहन खरीदने के लिए कोटा या जयपुर जाना पड़ता था। इसके लिए समय और पैसा दोनों ही खर्च होता था, लेकिन अब टोंक में भी कार बाजार लगने से खरीदारों को आसानी हो गई है। कमल ने बताया कि शहर में पांच कार बाजार है।


 जिन पर महिने में प्रति दुकान से पांच से सात दुपहिया वाहन की ब्रिकी हो जाती है। लोगों में सैकण्ड हैण्ड वाहन के प्रति रूझान को देखते हुए जिले के अन्य उपखण्डों पर भी कार बाजार लगने लगे है। 


कीमत 15 से 30 हजार 

सैकण्ड हैण्ड कार बाजार में 15 से 30 हजार रुपए की कीमत में मिल जाती है। इसमें बेचने वाला सिर्फ माध्यम होता है। जिसको एक वाहन पर 500 से 1000 रुपए की दलाली मिलती है। वाहन के रजिस्ट्रेशन व अन्य कागजी कार्रवाई  खर्च होने वाली राशि खरीदार को स्वयं वहन करनी होती है। दलाल सिर्फ  स्टाम्प पर सेल लैटर लिख कर देता है। 


लोग खुद छोड़ कर जाते हैं 

कार बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि लोग खुद उनके वाहन छोड़कर बेचने की कीमत बता जाते हैं।  कई वाहन मालिक तो ऐसे भी आते जो आधी कीमत या उससे भी कम में वाहन को बेच देते हैं। इनमें अधिकतर वो लोग होते हैं, जो तीन-चार महीने शौक पूरा कर नया वाहन ले लेते है और पुराने को कार बाजार में या अन्य को बेच देते हैं।  इससे उनका शौक भी पूरा हो जाता है और बाजार में आए नए मॉडल वाहन लेकर अपना शौक पूरा करते हैं। 



ये रखें सावधानी 

यातायात निरीक्षक रतन लाल ने बताया कि कार बाजार से वाहन लेते समय अच्छी तरह जांच पड़ताल कर लेना चाहिए, जिससे बाद में कोई कानूनी उलझन में नहीं पडऩा पड़े। सबसे पहले ये जांच लेना चाहिए कि जो वाहन आप ले रहे हैं वो चोरी का तो नहीं है। इसके बाद पता करे कि वाहन कहीं दुर्घटनाग्रस्त मामलों में वांछित तो नहीं है। 



इसके अलावा वाहन का इन्श्योरेंस रजिस्ट्रेशन फर्जी तो नहीं है। वाहन खरीदने से पहले अपने अच्छे जानकार मिस्त्री से वाहन का परीक्षण करवा लेना चाहिए, जिससे वाहन लेने के बाद अनावश्यक खर्चे से बचा जा सके।


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