सत्रांकों ने बिगाड़ी निजी स्कूलों की चाल

pawan sharma

Publish: Jul, 14 2017 08:56:00 (IST)

Tonk, Rajasthan, India
सत्रांकों ने बिगाड़ी निजी स्कूलों की चाल

सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की भरमार ये बताती है कि निजी स्कूलों की चमक फीकी पड़ती जा रही है। प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या सत्रांकों व प्रायोगिकी परीक्षाओं के कारण बढ़ रही है।

टोंक. नए शिक्षा सत्र की प्रवेश प्रक्रिया में सरकारी स्कूलों ने निजी विद्यालयों की चाल बिगाड़ दी है। मालपुरा के राजकीय सीनियर सैकण्डरी स्कूल में जहां क्षमता से अधिक विद्यार्थियों का प्रवेश के लिए आना हो या फिर टोंक के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की भरमार ये बताती है कि निजी स्कूलों की चमक फीकी पड़ती जा रही है।



 परिणामों पर नजर डालें तो निजी स्कूल कहीं आगे हैं, लेकिन अच्छे परिणामों के बावजूद विद्यार्थियों का रुझान सरकारी स्कूलों की तरफ ज्यादा है। ऐसा नहीं है कि सरकारी स्कूलों का परिणाम ठीक नहीं है। संख्यात्मक दृष्टिकोण से सरकारी विद्यालयों में भी उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत कमोबेश निजी विद्यालयों के बराबर ही है, लेकिन प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या सत्रांकों व प्रायोगिकी परीक्षाओं के कारण बढ़ रही है। 


क्या है गणित

दसवीं एवं सीनियर कला व विज्ञान बोर्ड परीक्षाओं के प्रत्येक विषय में 20 सत्रांक की सुविधा है। इससे विद्यार्थियों को केवल 80 अंकों के लिए ही परीक्षा देनी होती है। विद्यार्थियों को 20 सत्रांक उसके आन्तरिक परीक्षाओं के मूल्यांकन के आनुपातिक आधार से दिए जाते हैं। इसमें टेस्ट समेत उत्तर पुस्तिकाओं का रखरखाव आदि शामिल है। 



वर्ष 2010-11 से ही 20 सत्रांक दिए जाने लगे हैं, जबकि इससे पहले वर्ष 2004 से 2010 तक केवल 10 सत्रांक ही दिए जाते थे। शुरुआत में केवल निजी विद्यालय ही विद्यार्थियों को 20 में से 19 या 20 अंक देकर अपने परिणामों को अच्छा बना लेते थे, लेकिन अब सरकारी स्कूल भी इस श्रेणी में शामिल हो गए। विद्यार्थी को उत्तीर्ण होने के लिए 100 में से 33 अंक लाना अनिवार्य हैं। 


अब सत्रांक के रूप में 19 या 20 अंक मिलने पर उत्तीर्ण होने के लिए महज 13-14 अंक आवश्यक होते हैं। इसके चलते सत्रांक को अब तो 'कृपांक भी बोला जाने लगा है। विद्यार्थी को पूरे सत्रांक दिए जाने पर बोर्ड की ओर से विद्यालय या विषयाध्यापक से स्पष्टीकरण भी नही मांगा जाता। सीनियर कक्षाओं में सत्रांकों का यह खेल और भी रोचक हो जाता है। 


सीनियर कक्षा में विज्ञान व कला वर्ग के ज्यादातर विषयों में प्रायोगिक परीक्षा ली जाती है। इनमें अंक भार 30 होता है। वीक्षकों की ओर से अधिकतर को 27 से लेकर 30 अंक तक दिए जाते हैं। अब अंकों की गणित के अनुसार छात्र को सत्रांक व प्रायोगिक परीक्षा के जरिए 47 से अधिक अंक मिल जाते हैं।  लिखित परीक्षा मेंं 13 अंक मिलते ही परिणाम 60 प्रतिशत में बदल जाता है। 

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