फर्जीवाड़े के 51 साल बाद निरस्त हुआ 10 बीघा जमीन का आवंटन

madhulika singh

Publish: Jul, 17 2017 04:55:00 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
फर्जीवाड़े के 51 साल बाद निरस्त हुआ 10 बीघा जमीन का आवंटन

सन 1966 में मिलीभगत कर पटवारी ने भाई के नाम करवा दी थी जमीन

कस्बे में 51 साल पहले तत्कालीन पटवारी द्वारा फर्जीवाड़ा कर भाई के नाम करवाई 10 बीघा जमीन का आवंटन जिला कलक्टर ने निरस्त कर दिया है। कारण, भूमि नेशनल हाईवे-76 से सटी और कृषि विशेष क्षेत्र माल में होने से न सिर्फ बेशकीमती है, बल्कि पानी का प्राकृतिक प्रवाह मार्ग भी है। इसी रास्ते से आने वाला बरसाती पानी कस्बे के दोनों प्रमुख तालाबों को भरता है। मामला यहां खसरा 1214/2 से जुड़ा है। यह जमीन वर्ष 1966 में लक्ष्मीलाल पुत्र घासी लाल महाजन के नाम से आवंटित हुई थी। आवंटन आदेश उसके भाई सोहनलाल ने 8 जुलाई, 1964 को करवाया था, जो तब पटवारी था। उसी ने दो साल बाद नामांतरण भी करवा लिया। हालांकि आवंटन की पत्रावली नहीं थी। चार साल पहले ग्रामीणों के विरोध और राजस्थान पत्रिका के समाचार के बाद मामले में जांच बैठी थी। पत्रिका ने तह तक झांका तो चौंकाने वाली कहानी सामने आई।



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बेखबर आवंटी को माफिया ने दिलाई याद, धमकियों पर पटवारी ने जोड़ लिया पूरा गांव

दरअसल, लक्ष्मीलाल को भी इस जमीन का भान नहीं था। उसे पता वर्ष 2002 में लगा, जब उदयपुर से चित्तौडग़ढ़ नेशनल हाईवे के लिए जमीन अवाप्त होने लगी। तब क्षेत्र का भूमाफिया खरीद-फरोख्त में सक्रिय था। इन्हीं में से कुछ ने लक्ष्मीलाल से भी संपर्क किया था। सौदा तय नहीं हुआ, लेकिन तब से आवंटी जमीन को बेचने के लिए इसे खातेदारी में बदलने के प्रयास में जुट गया। वर्ष 2013 में यह जमीन खरीदने के लिए माफिया फिर सक्रिय हुआ। ग्रामीणों के अनुसार इसमें कुछ नेता भी शामिल थे। गैर खातेदारी से खातेदारी में लाने के लिए आवेदन पहुंचा, लेकिन तत्कालीन पटवारी मनोहरलाल उपाध्याय ने जमीन तालाब के जल भराव क्षेत्र की बताकर मना कर दिया। धमकियां और दबाव बढऩे पर पटवारी ने मामला पंच-मोतबिरों के बीच जा रखा और पूरा गांव जुड़ गया। विरोध और सरकार तक ज्ञापन पहुंचाने के बाद उपखण्ड अधिकारी ने जांच करवाई।


ग्रामीणों और पटवारी का संघर्ष सफल हुआ। धमकियों के बावजूद पटवारी ने उपयुक्त कार्रवाई कर तालाब के अंदर पानी की आवक तय करने वाली प्रमुख जमीन को बचाया। 

मांगीलाल सिंगावत, मेनार

उच्च अधिकारियों द्वारा  प्राप्त निर्देश के बाद उक्त जमीन का सार्वजनिक प्रयोजनार्थ आरक्षित करवाने का प्रस्ताव तैयार कर तहसील कार्यालय भिजवा दिया है।

उदयलाल, पटवारी मेनार-वल्लभनगर

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