पत्रिका पड़ताल: उदयपुर में घटित इस घटना को पढ़ने के बाद आप भी यही कहेंगे कि दर्द क्या होता है, उस मां से पूछिए जिसने अपने कलेजे का टुकड़ा खोया हो

madhulika singh

Publish: May, 18 2017 01:01:00 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
पत्रिका पड़ताल: उदयपुर में घटित इस घटना को पढ़ने के बाद आप भी यही कहेंगे कि दर्द क्या होता है, उस मां से पूछिए जिसने अपने कलेजे का टुकड़ा खोया हो

क्यूं होता है ऐसा कि किसी कि गरीब कि जिन्दगी हमेशा इतनी सस्ती हो जाती है। निश्चित ही मकान, भवन बनना किसी के लिए बड़ा सपना होगा, लेकिन घर का लाडला नहीं रहे, ये पीड़ा पहाड़ से भी ऊंची है। क्या गरीब की जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती।

दर्द क्या होता है, उस मां से पूछिए जिसने अपने कलेजे का टुकड़ा खोया। उस परिवार से जानिए, जिसके बीच खिलखिलाता बचपन गुम हो गया। निश्चित ही मकान, भवन बनना किसी के लिए बड़ा सपना होगा, लेकिन घर का लाडला नहीं रहे, ये पीड़ा पहाड़ से भी ऊंची है। क्या गरीब की जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती। सरकार हो या सम्पन्न लोग, श्रमिकों की कोई परवाह नहीं करता। उनके परिवार और सुविधाओं के लिए नहीं सोचा जाता। मन कचौटती बातों का जवाब नहीं किसी के पास। आखिर कौन जिम्मेदार है, उस मासूम की मौत का, जो निर्माण स्थल पर परिवार के साथ रह रहा था।


हम बात कर रहे हैं ऐसे हालातों की, जो निर्माण स्थलों पर श्रमिकों के आसपास होते हैं। शहर में सैकड़ों जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं, लेकिन वहां काम कर रहे श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा के बंदोबस्त नाकाफी है। हालात बेहतर होते तो शायद बडग़ांव की घटना का जिक्र नहीं होता, जिसमें एक मासूम की जान चली गई।




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निर्माण स्थल पर गड्ढे में नन्हे गौतम की मौत कई सवालों के साथ जिम्मेदारों को भी कठघरे में खड़ा कर रही है। यह अलग है कि श्रमिक दंपती के साथ हुई इस अनहोनी पर न कहीं ज्यादा जिक्र है, न फिक्र। लेकिन सवाल यह है कि हंसते-खिलखिलाते मासूम को आखिर क्यों जिंदगी से हाथ धोना पड़ा? राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की। जानकारों से भी बात की। सामने आया कि निर्माण स्थल पर महिला श्रमिक के साथ आने वाले बच्चों के लिए पालना-घर होना जरूरी है, जहां बच्चों के खेलने के साथ ही खाने-पीने की व्यवस्था हो, लेकिन शहर में निर्माण स्थलों पर ऐसी कोई सुविधा नजर नहीं आई। ज्यादातर जगह माता-पिता मजदूरी करते रहे, जबकि इनके बच्चे आसपास असुरक्षित माहौल में था।



यह है मामला

बडग़ांव में शांति निकेतन के समीप निर्माणाधीन मकान में कॉलम खड़ा करने के लिए खोदे गए गड्ढे से मंगलवार को चार साल के गौतम का शव मिला था। खेल-खेल में बच्चा करीब पांच दिन पहले इसमें जा गिरा था। वहां मजदूरी कर रहे पिता भंवरलाल गमेती और मां ने काफी तलाश की, लेकिन बच्चे का कहीं पता नहीं चला। 

शव का पता इससे दुर्गंध उठने पर लग पाया था।

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