दान पात्र से संवरेगी विद्यालयों की सूरत, उदयपुर में शुरू हुई ये प्रक्रिया

madhulika singh

Publish: Jul, 11 2017 02:45:00 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
दान पात्र से संवरेगी विद्यालयों की सूरत, उदयपुर में शुरू हुई ये प्रक्रिया

जिले के 144 स्कूलों का बन गया पेन कार्ड

सरकार ने सरकारी विद्यालयों के कायाकल्प के लिए अक्षय दान पात्र योजना लागू की है। इसमें विद्यालय प्रबंधन एवं  संचालन समिति को पेन कार्ड बनने के साथ ही आयकर विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसके बाद जो भी भामाशाह सरकारी स्कूल में दान करेगा, उसे समिति की रसीद दी जाएगी। आयकर विवरण पत्र में इसका उल्लेख करके भामाशाह आयकर अधिनियम की धारा 80 जी के तहत छूट पा सकेगा। 


जिले के करीब 144 माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों की समितियों ने अपना पेन कार्ड बनवा लिया है। इसी तरह दस से ज्यादा विद्यालयों की  समिति ने आयकर विभाग में अपनी रजिस्टे्रशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना के तहत विद्यालयों में अक्षय दान पात्र रख दिए गए हैं। इनसे प्राप्त होने वाली राशि से विद्यालयों में विकास कार्य करने में सहायता मिलेगी।



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रजिस्ट्रेशन में आ रही दिक्कत

सरकारी विद्यालयों में पहले विकास कोष समिति का संचालन होता था। अब इसका नामकरण विद्यालय प्रबंधन एवं संचालन समिति किया जाएगा। इसके लिए विद्यालयों में आम सभा की बैठक कर नाम परिवर्तन का प्रस्ताव लेकर कॉपरेटिव विभाग देते हुए पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। नाम में बदलाव होने के बाद पेन कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। पेन कार्ड आने के बाद जयपुर आयकर विभाग में रजिस्ट्रेशन होगा। इस योजना को अभी कम स्कूलों में काम हुआ है। धीरे-धीरे सभी स्कूलों में यह प्रभावी हो जाएगी। 

समिति की होगी ऑडिट

समिति का आयकर विभाग में रजिस्ट्रेशन होने के बाद हर तीन साल में ऑडिट करवानी होगी। इसके साथ दान पात्र से आई राशि का हिसाब-किताब रखना होगा। 



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दानदाता का होगा इजाफा

अभी सरकारी स्कूलों को भामाशाह अपनी स्वेच्छा से सहयोग करते हैं। मगर जब विद्यालय में अक्षय दान पात्र रखा रहेगा, तो लोग अपने सामथ्र्य के अनुसार इसमें राशि दान कर सकेंगे। आयकर विभाग से छूट मिलने से भामाशाहों की संख्या में भी इजाफा होगा।


सरकार की अक्षय दान पात्र योजना के लिए सभी संस्था प्रधान को निर्देश दे दिए हैं। करीब 70 प्रतिशत स्कूलों में इनको रख दिया गया है, जिसकी दो चाबी होंगी। एक चाबी विद्यालय प्रबंधन एवं संचालन समिति के सदस्य के पास व दूसरी संस्था प्रधान के पास रहेगी। विद्यालय में होने वाले समारोहों में इसे रखा जाएगा जिससे कोई भी स्वेच्छा से दान कर सकेगा। 

मधुसूदन व्यास जिला शिक्षा अधिकारी उदयपुर

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