गोधूलि वेला में होगा होलिका दहन, कल उड़ेंगे होली के रंग

Udaipur, Rajasthan, India
गोधूलि वेला में होगा होलिका दहन, कल उड़ेंगे होली के रंग

रविवार को होलिका पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शाम 6.39 बजे से रात 9.13 बजे तक होलिका दहन किया जा सकता है।

 होली पर्व रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए शहर में जगह-जगह होलिका और इसके दहन की सामग्रियों को बेचने के लिए शुक्रवार देर रात से ही ग्रामीण जमा हो गए। प्रमुख चौराहों और मार्गों पर कई जगह हाट लगाए गए। इनमें सुबह से शाम तक सामग्रीयां बेची गई। शहर के आसपास के क्षेत्रों के गांवों से लोग होली के डंडे, चारा, कंडे, लकडि़यां आदि लाए। इनको मल्लातलाई, घंटाघर, हाथीपोल, देहलीगेट, सूरजपोल आदि प्रमुख स्थलों पर की शुक्रवार देर रात को ही जमा दिया गया। शनिवार सुबह से इनकी बिक्री शुरू हो गई। लोग होली के डंडे के साथ ही अन्य सामग्री को मोल भाव कर ले गए।

बाजार में बिकने लगे वडुलिया

होली पर गोबर के वडुलिया (छेददार उपले) बनाने की परंपरा लुप्त होती जा रही है। जानकारों के अनुसार कुंवारी कन्याएं होली से पूर्व ही गोबर से वडुलिया और अन्य प्रकार के जैवर बनाती है। इन्हें होलिका दहन के समय होली और प्रहलाद पर अर्पण किया जाता है। इसके साथ ही प्रहलाद जैसे भक्त वर की कामना की जाती है। गांवों में यह परंपरा आज भी जीवित है। लेकिन शहरों में यह लुप्त हो गई है। इधर शनिवार को आए होली विक्रेता अपने साथ वडुलिये भी लाए हैं।


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होलिका दहन के साथ ही त्यौहारों का आगाज

होलिका दहन के साथ ही चैत्र मास की शुरुआत हो जाती है। इस मास में कई पर्व मनाए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से जमराबीज, रंग पंचमी, दशामाता, गणगौर आदि पर्व मनाए जाएंगे। गणगौर मनाने वाली महिलाएं धुलंडी के दिन होलिका की राख से सौलह पिंड बनाती है और घर ले जाकर इनकी पूजा करती है। इसके साथ ही सप्तमी से गणगौर की पूजा भी शुरू हो जाती है।

यह रहेगा मुहूर्त

पंडित पियूष दशोरा ने बताया कि फाल्गुन मास की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता हे। इस दिन भद्रा रहित काल में होलिका दहन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि रविवार को होलिका पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शाम 6.39 बजे से रात 9.13 बजे तक होलिका दहन किया जा सकता है। होलिका दहन के समय वायु के प्रवाह के माध्यम से शकुन सूत्र का उपयोग कर भविष्य कथन किए जाते हैं।

व्यंजनों की खुशबू से महकी गलियां

होली पर्व की तैयारी को लेकर शनिवार शाम को विविध व्यंजन बनाने का क्रम शुरू हो गया। इसके तहत चावल और मक्की की पपडि़यां तलने के साथ ही गूंजे, आटे और बेसन की मिठी और चरकी पुडि़यां आदि तली गई। इनकी खुशबू शहर की गलियों में देर रात तक व्याप्त रही।

मंदिरों में रहेगी विशेष धूम

शहर के कृष्ण मंदिरों में होली का पर्व श्रद्धा से मनाया जाएगा। इस दिन भक्तों के साथ ही भगवान भी रंगों से सराबोर होंगे। विशेष शृंगार धराने के साथ ही विविध व्यंजनों का भोग भी धराया जाएगा। कृष्ण मंदिरों में होली और धुलंडी के दिन सखा भाव के कीर्तन किए जाएंगे।

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