राजस्थान का ये किसान बन गया है मिसाल, जैविक खेती कर दुनिया को परोस रहा शुद्ध अनाज

Udaipur, Rajasthan, India
राजस्थान का ये किसान बन गया है मिसाल, जैविक खेती कर दुनिया को परोस रहा शुद्ध अनाज

सत्यमेव जयते शो में भी आ चुकी है सक्सेज स्टोरी चालीस एकड़ में फैला है जैविक कृषि फार्म

झालावाड़ जिले के मानपुरा गांव के  स्वामी विवेकानंद जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र (कृषि फार्म) के संस्थापक हुकमचंद पाटीदार। भले ही यह नाम आपके लिए अनजाना हो, लेकिन यह नाम दुनियाभर में जैविक कृषि के लिए मिसाल बना हुआ है। इनके जैविक कृषि फार्म पर नित नए प्रयोग करते हुए जैविक फसल का उत्पादन हो रहा है। जहां से विश्व के सात देशों में रहने वाले लोगों की रसोई तक इस फार्म का अनाज पहुंचता है। पाटीदार प्रदेश में जैविक कृषि के उदाहरण बनकर उभरे हैं। इनकी सक्सेज स्टोरी को बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के सत्यमेव जयते शो में भी दिखाया जा चुके हैं। साथ ही इन्हें कृषि क्षेत्र में कई पुरस्कार भी मिले हैं। 



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2004 में की जैविक कृषि की शुरूआत

हुकमचंद बताते हैं कि दिसम्बर 2004 में जैविक कृषि क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। सबसे पहले चार बीघा खेत पर जैविक फसल उत्पादन किया। पहले साल गेहूं की फसल उत्पादन में चालीस प्रतिशत गिरावट आई, लेकिन यह सोच लिया था कि कुछ भी हो रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशी का उपयोग नहीं करेंगे। बैंक से लोन लिया। पंचगव्य का वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर उसका उपयोग किया। इस बार फसल अच्छी हुई। नुकसान की भरपाई होने लगी। सिलसिला चल पड़ा। पूरे चालीस एकड़ में फैले फार्म में जैविक आधारित कृषि शुरू कर दी। शुरुआत में कम उत्पादन, मार्गदर्शक नहीं होना, विकल्प की कमी, बाजार आदि की समस्याएं भी आई लेकिन हार नहीं मानी। तब से लेकर अब तक त्वरित वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर जैविक फसल उत्पादन जारी है।



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वेबसाइट के माध्यम से पहुंचाते हैं उत्पाद 

हुकमचंद ने बताया कि जैविक उत्पादों को फार्म टू कीचन डॉट कॉम वेबसाइट के माध्यम से पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश व राजस्थान के विभिन्न शहरों में पहुंचाया जाता है। जैविक आटा भी क्षेत्र में सप्लाई होता है। फार्म पर गेहूं, जौ, चना, मैथी, धनिया, लहसून आदि की खेती होती है। साथ ही दो हजार पौधों के जैविक संतरों के बाग में बड़ी संख्या में संतरों का उत्पादन होता है। जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र देश के उन चुनिंदा केन्द्रों में जहां पर केन्द्र सरकार की दीन दयाल उपाध्याय उन्नत कृषि योजना के तहत किसानों को जैविक कृषि का प्रशिक्षण दिया जाता है। केन्द्र सरकार की ओर से केन्द्र को तीस किसानों के पांच बैच के प्रशिक्षण का जिम्मा सौंप रखा है।

सात देशों में एक्सपोर्ट 

आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, जर्मनी, फ्रांस, श्रीलंका और कोरिया तक जैविक उत्पादों की बिक्री होती है। साथ ही इन देशों के विद्यार्थी, व्यापारी जैविक कृषि की तकनीक देखने-समझने फार्म पर आते हैं। इनमें कुछ विदेशी कम्पनियां तो सीधे फार्म से आयात करती है। तो कुछ बिक्री भारतीय कम्पनियों के जरिए बाहर जाता है।

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