रैंकिंग पाने के लिए पुलिस ने अपनाए ऐसे हथकंडे कि पढ़कर आप भी रह जाएंगे दंग

Ashish Joshi

Publish: Jul, 09 2017 02:18:00 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
रैंकिंग पाने के लिए पुलिस ने अपनाए ऐसे हथकंडे कि पढ़कर आप भी रह जाएंगे दंग

अपराधों की रोकथाम के लिए ज्यादा से ज्यादा कार्रवाई करो और अंक ले जाओ। अंकों की इस गणित में जिले का खेरवाड़ा थाना कई बार राज्य में अव्वल रहा, लेकिन 60 पुलिस एक्ट शराब के एक मामले में की गई कार्रवाई में उसकी सारी पोल खुल गई।

अपराधों की रोकथाम के लिए ज्यादा से ज्यादा कार्रवाई करो और अंक ले जाओ। अंकों की इस गणित में जिले का खेरवाड़ा थाना कई बार राज्य में अव्वल रहा, लेकिन 60 पुलिस एक्ट शराब के एक मामले में की गई कार्रवाई में उसकी सारी पोल खुल गई।


 इस कार्रवाई में पुलिस ने एक टैक्सी संचालक के साथ अपने ही महकमे के सिपाही को ही भी मुल्जिम बना दिया। खेरवाड़ा न्यायालय में पेश हुए इस्तगासे में दोनों के विरुद्ध आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। राजस्थान राज्य बनाम सुरेश कुमार जाट व राकेश रावल के प्रकरण में  सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट खेरवाड़ा ने दोनों को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। 



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परिवादी राकेश ने कहा- अंक बढ़ाने के लिए फंसाया

परिवादी राकेश का कहना है कि वह घटना वाले दिन टैक्सी लेकर अहमदाबाद से आ रहा था। बिछीवाड़ा के पास कार में एक दम्पती को उदयपुर के लिए बिठाया। खेरवाड़ा बसस्टैण्ड के आगे हाई-वे टी प्वाइंट पर हाथ देने पर गाड़ी रोकी, वहां पर एक युवक को बिठाया, तभी थाने की गाड़ी ने उसे रोक दिया। मुंह सूंघकर पूछने लगे शराब पी रखी है क्या? बिना कुछ बोले कार में बैठे दम्पती को उतार दिया और मुझे व बसस्टैण्ड पर बैठे युवक को जीप से थाने ले गए। बाद में कार को सिपाही थाने लेकर आया।


 मुझे थाने में पता चला कि मेरे साथ आया युवक पुलिस का ही सिपाही होकर उसका नाम सुरेश है। थानाधिकारी रतनसिंह ने उसी वक्त एएसआई महेन्द्रसिंह चावड़ा को बुलवाया, पूछा क्या करना है, महेन्द्र ने कहा साहब 60 पुलिस एक्ट का कोटा कम पड़ रहा है। फिर हमसे पूछा यहां कोई परिचित है क्या, अभी छोड़ देंगे। राकेश का कहना है कि मैंने परिचित रिश्तेदार महिला को बुलाया। उसकी जमानत पर मुझे छोड़ा गया जबकि सुरेश को प्रमोद अग्रवाल की जमानत पर छोड़ा गया। जबकि हकीकत में पुलिस ने इसी अग्रवाल को इस्तगासे में परिवादी बनाया।   




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खेरवाड़ा थानाधिकारी रतनसिंह ने 3 सितम्बर 2016 को न्यायालय में एक परिवाद पेश किया। उन्हें प्रमोद अग्रवाल ने टेलीफोन पर सूचना दी कि पुराने न्यायालय के बाहर एक नम्बर ठेके के पास दो व्यक्ति झगड़ा कर रहे हैं जो नशे में मदहोश हैं, जाब्ता भिजवाएं। जिस पर वे स्वयं, एएसआई महेन्द्रसिंह, कांस्टेबल ब्रायदीन व प्रेमशंकर के साथ मौके पर पहुंचे। 


सर्विस लाइन के पास दो व्यक्ति मिले जो जोर-जोर से चिल्ला रहे थे। शराब ठेके वालों की तरफ इशारा कर रहे थे कि ठेका खोल, शटर ऊंचा कर शराब लेना है। मौके पर काफी लोग एकत्रित हो गए, मार्ग अवरुद्ध हो गया। भीड़ को हटाकर दोनों व्यक्तियों को पकड़ा। आरोपित में से एक पुलिस कांस्टेबल सुरेश पुत्र रामकरण जाट तथा दूसरा कानपुर (बावलवाड़ा) निवासी राकेश पुत्र मगनलाल रावल बताया। पुलिस का कहना है कि दोनों के मुंह  से बदबू आ रही थी, दोनों ही स्वयं को पुलिस की स्पेशल टीम के सदस्य बता रहे थे। दोनों को जीप में बिठाकर थाने लाए, बे्रथएनेलाइजर से जांच की तो दोनों के शराब पीने की पुष्टि हुई। दोनों के विरुद्ध धारा 60 पुलिस एक्ट 2007 के तहत कार्रवाई कर न्यायालय इस्तगासा बनाया।  


 कांस्टेबल सुरेश को अपराधिक प्रवृत्ति के युवक राकेश के साथ पकड़ा था। बिना अवकाश के वह राकेश के साथ यहां क्यूं आया? कार्रवाई के दौरान दोनों नशे में थे। 60 पुलिस एक्ट में कार्रवाई की थी। इस सिपाही के विरुद्ध अधिकारियों ने कार्रवाई की थी। स्टाफ को बरगलाकर उनसे बयान बदलवा लिए होंगे। इनके विरुद्ध आगे अपील करेंगे।

- रतनसिंह थानाधिकारी, खेरवाड़ा 

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