जनसुनवाई में फूटा आक्रोश: किसान बोले एसी में बैठ बना देते हैं नियम, हम क्या आत्महत्या करें?

Ashish Joshi

Publish: Jul, 11 2017 12:09:00 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
जनसुनवाई में फूटा आक्रोश: किसान बोले एसी में बैठ बना देते हैं नियम, हम क्या आत्महत्या करें?

उदयसागर झील संरक्षित क्षेत्र में आने वाले 13 गांवों के लोगों ने अंतिम अधिसूचना जारी होने से पहले मांगी गई आपत्तियों को लेकर सोमवार को हुई जनसुनवाई में जमकर रोष जताया।

उदयसागर झील संरक्षित क्षेत्र में आने वाले 13 गांवों के लोगों ने अंतिम अधिसूचना जारी होने से पहले मांगी गई आपत्तियों को लेकर सोमवार को हुई जनसुनवाई में जमकर रोष जताया। किसानों ने तंज कसते हुए कहा कि अफसर तो एयर कंडीशनर (एसी) में बैठकर नियम-कानून बना देते हैं, किसान क्या आत्महत्या करें? ऐसे नियम कानून बनाने से पहले बरसों से इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों से भी तो पूछते और उनको भी किसी कमेटी में शामिल करते। 

नगर निगम सभागार में जिला कलक्टर बिष्णुचरण मल्लिक, नगर निगम आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग और गिर्वा उपखंड अधिकारी कमर चौधरी ने जन सुनवाई की। 




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किसानों व ग्रामीणों ने कहा कि  उनके बच्चों की शादी होगी तो क्या उनको घर बनाने के लिए क्या जयपुर के चक्कर लगाएंगे। उनके घर में छोटा सा निर्माण भी नहीं कर सकेंगे। किसानों ने कहा कि पीएम मोदी अच्छे दिन की बात कर रहे हैं और यहां हम पर क्या बीत रही है, कोई सुनने  वाला नहीं है।

उन्होंने कहा कि एसी में बैठकर योजनाएं बनाने के बजाय पहले उस क्षेत्र में रहने वाले और प्रभावित की बात सुननी चाहिए थी ताकि हकीकत सामने आ जाती। यह स्थिति तो आत्महत्या के लिए मजबूर करने जैसी है। सभागार में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एक-एक गांव की सुनवाई करने का पूर्व में बनाया गया कार्यक्रम निरस्त कर सामूहिक रूप से सुनवाई की गई। उदयसागर झील संघर्ष समिति के बैनर तले भी बड़ी संख्या में लोग आए, आपत्तियां रखने जनप्रतिनिधि व महिलाएं भी आईं। 




सुनवाई में किसानों ने जमकर गुस्सा निकालते हुए कहा कि उनके गांवों की कृषि, आवासीय, सामुदायिक एवं धार्मिक भूमि पर झील संरक्षण के नाम पर मानवीय गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाकर सरकार क्या करना चाहती है? प्रो महेश शर्मा ने कहा कि वर्ष 2012 में ही स्वर्ण चतुर्भुज सिक्स लेन बाइपास निकालने की योजना मंजूर की, आज जब झील संरक्षित घोषित कर दी तो अब बाइपास कैसे निकाल रहे है?

सिहाग बोले, खेती कर सकेंगे किसान

किसानों के विरोध के बीच आयुक्त सिहाग ने कहा कि किसानों को परेशान नहीं होने देंगे, वे खेती कर सकेंगे। इस दौरान उदयसागर संघर्ष समिति के अध्यक्ष विमल भादविया (सरपंच), महामंत्री ओनार सिंह देवड़ा, सचिव प्रकाश ओबरावल, उपाध्यक्ष तखतसिंह देवड़ा, निर्मल भादविया, जग्गुराम मीणा, हीरालाल डांगी, धनजी भोई, कानजी भोई, मोहन गमेती, हिम्मत सिंह, ओम प्रकाश गर्ग आदि मौजूद थे। 



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अब फतहसागर-पिछोला का प्रस्ताव

ग्रामीणों ने फतहसागर व पिछोला को संरक्षित घोषित नहीं होने का सवाल उठाया तो जनसुनवाई में अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही पुन: से फतहसागर व पिछोला झील के प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। पहले भेजा था लेकिन सरकार ने वापस मांगा है। 


पार्किंग को लेकर भी चर्चा 

जनसुनवाई में आए लोगों में कई भाजपा से जुड़े थे। उनका कहना था कि इस सभागार में पहले जब किसी कार्यक्रम में आए तब हमारी गाड़ी बाहर ही खड़ी रहती थी लेकिन आज किसान के रूप में आए तो हमारी गाड़ी यहां खड़ी नहीं करने दी। 





कुर्सियां मंगानी पड़ी

सभागार की सारी कुर्सियां भर गई थी। इसके बाद भी कई लोग खड़े थे तो आयुक्त ने और कुर्सियां मंगाई। भीड़ ने भारी गुस्सा दिखाते हुए कहा कि सरकार को उनकी भावनाओं पर विचार कर ही निर्णय करना होगा। 



समिति व किसानों ने ये रखी मांगें 

-सूखा नाका नाम ही इसलिए पड़ा कि वहां आकर झील सूख जाती है ऐसे में झील की सीमा वहीं तक रखी जाए और उसका दायरा आगे नहीं बढ़ाया जाए। 

-इन गांवों का पानी इतना जहरीला है कि बर्तन में छेद हो जाता है। 

-इसी जहरीली पानी की सब्जियां उदयपुर व गांवों में बिक रही है। 

-खरबडिय़ा माइंस से साफ पानी इन गांवों को दिया जाए। 

-उदयसागर झील के ओवरफ्लो की चौड़ाई बढ़ाई जाए। 

-झील का क्षेत्र नहीं बढ़ाकर इससे मिट्टी निकालकर भराव क्षमता बढ़ाई जाए। 

-ऐसे लोगों को भी सदस्य बनाए जाए जो उस क्षेत्र को जानते-समझते हैं। 

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