STING: उदयपुर के इस मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़, अनाड़ी हाथ कर रहे जांच

Udaipur, Rajasthan, India
STING:  उदयपुर के इस मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़, अनाड़ी हाथ कर रहे जांच

आरएनटी मेडिकल कॉलेज, बायोकेमेस्ट्री लैब में लाखों की मशीनों पर अनजान चेहरे कर रहे जांच, टीम के पहुंचते ही सीट छोड़ जाने लगे फर्जी लैब टेक्निशियन

रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जिंदगी से एक बार फिर खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। सेंट्रल और बायोकेमेस्ट्री लैब में कई अनाड़ी और अनजान हाथ मरीजों के सैम्पल की जांच कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि अस्पताल की मिलीभगत से चोरी छिपे यहां काम कर रहे एेसे युवाओं का लैब के रिकॉर्ड में कोई जिक्र भी नहीं है। कला संकाय से 12वीं पास निजी डिप्लोमा संस्थान के विद्यार्थी यहां स्टाफ की मिलीभगत से रक्त, यूरिन और करीब 52 तरह की जांच प्रक्रियाओं को अंजाम दे रहे हैं। मरीजों के भविष्य से इस कदर खिलवाड़ हो रहा है कि लैब के जिम्मेदार ड्यूटी से नदारद होकर अनजान हाथों से यहां की व्यवस्थाएं संचालित कराने में लगे हैं। इतना ही नहीं, स्टाफ का आलम भी इस कदर बिगड़ा हुआ है कि छुट्टी पर होने के बावजूद कुछ कर्मचारी दूसरे दिन आकर उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह खेल बीते लंबे समय से चल रहा है। लोगों की एेसी ही शिकायतों पर पत्रिका टीम ने हकीकत जानने के प्रयास किए तो सच चौंकाने वाला मिला। नियमित कार्मिकों के अभाव में लाखों के लैब उपकरण एवं प्रयोगशाला यहां अनजान हाथों से संचालित होते हुई मिली। पत्रिका टीम के पहुंचते ही ये विद्यार्थी इधर-उधर होने लगे। गौरतलब है कि लैब में प्रतिदिन तकरीबन 15 से 18 सौ जांचें होती हैं। इसी तरह एमबी हॉस्पिटल एवं जनाना चिकित्सालय में प्रतिदिन करीब 5 हजार का ओपीडी रहता है।



पहचान ही नहीं, छुट्टी के बावजूद हस्ताक्षर

कॉलेज की प्रयोगशाला की स्थिति देखने पर सामने आया कि संविदा कार्मिकों के नाम पर यहां का स्टाफ लोगों को गुमराह करता है। मौके पर बायो मेडिसिन वार्ड की प्रयोगशाला में नमूनों की जांच करता हुए मिले युवक का लैब के संविदा रजिस्टर में नाम तक नहीं मिला। बिना देर लगाए युवक मौके से भाग निकला। वहीं यूरिन जांच कार्य को अस्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पूरा करते देखे गए। आलम यह था कि संविदा पर नियुक्त एक महिला कर्मचारी ने संबंधित युवक को पहचानने से ही इनकार कर दिया। जब बात लैब प्रभारी तक पहुंची तो और भी गहरा सच सामने आया। ड्यूटी के बावजूद लैब प्रभारी नदारद मिले। उनके कमरे में उपस्थिति पंजिका मंे प्रभारी बाबूलाल के नाम की छुट्टी की चार एप्लीकेशन रखी मिली, लेकिन इन सभी दिनों के दौरान उनके हाजरी रजिस्टर में हस्ताक्षर मिले। एेसा ही हाल अन्य कार्मिकों की छुट्टियों और प्रार्थना-पत्र के रखे होने का मिला।



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फर्जीवाड़े का सच

फर्जीवाड़े की पड़ताल करने पर सामने आया कि प्रयोगशाला में संविदा सहित अन्य पदों पर कार्यरत लैब टेक्निशियन निजी संस्थानों में बतौर शिक्षक सेवाएं देते हैं। यह ही कर्मचारी संस्थान में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को प्रायोगिक कराने के लिए मेडिकल कॉलेज की लैब में लाते हैं। एप्रिन पहनकर हुबहू दिखने वाले फर्जी लैब टेक्निशियन अकेले व्यवस्था संचालित करते रहते हैं। दूसरी ओर अधिकांश स्टाफ मिलीभगत करते हुए छुट्टी के दिन रजिस्टर में प्रार्थना-पत्र रख जाते हैं। उच्चाधिकारियों के आने पर उन्हें प्रार्थना-पत्र दिखा दिया जाता है, जबकि दूसरे दिन आकर यही कर्मचारी उनके नाम के आगे हस्ताक्षर कर देते हैं। दूसरी ओर लैब के जिम्मेदार दिन के समय यहां एसी कक्ष में सुस्ताते दिखते हैं।


जुटाता हूं जानकारी

बायो केमेस्ट्री विभाग का एचओडी होने के कारण संबंधित लैब मेरे अधीन है। यहां फर्जी लैब टेक्निशियनों की ओर से जांच करने की जानकारी नहीं है। इसी तरह कार्मिकों की ओर से फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले की भी जांच करवा जानकारी जुटाता हूं।


ए.के.वर्मा, अतिरिक्त प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज 


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