महीने के दूसरे शनिवार को स्कूलों में होने वाली बाल सभा में दादी-नानी सुनाएंगी किस्से कहानियां

Udaipur, Rajasthan, India
महीने के दूसरे शनिवार को स्कूलों में होने वाली बाल सभा में दादी-नानी सुनाएंगी किस्से कहानियां

दादी-नानी के किस्से कहानियां अब घर तक ही नहीं रहेंगे, बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कारित करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग उन्हें अब स्कूलों में भी आमंत्रित करेगा। हाल ही इस संबंध में सरकार स्तर पर निर्णय हुआ है। 




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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व वर्षों के अनुभव के आधार पर बच्चों को अपनी दादी/नानी से कहानियां सुनने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। परिवारों में दादी/नानी व अन्य बुजुर्ग भी अपने बच्चों को उत्साह से पारम्परिक मूल्यों से संबंधित कहानियां सुनाते हैं। यह परम्परा कोई आज की नहीं है बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय परिवारों में चली आ रही है। ये कहानी सुनने-सुनाने की परम्परा बच्चों के मनोरंजन के साथ ही उन्हे संस्कारित भी करती हैं। प्राचीन भारतीय मूल्यों के प्रति बच्चों के बालमन में श्रद्धा भी उत्पन्न करती हैं। साथ ही संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी अग्रसित होते हैं। 


निदेशक ने दिए निर्देश


निदेशक ने हाल ही शिविरा पंचांग में सहशैक्षिक गतिविधियों के तहत शनिवारीय बाल सभा के लिए स्थाई निर्देश दिए हैं। ये निर्देश माध्यमिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को दिए हैं। निदेशक की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी को अपने क्षेत्र के समस्त विद्यालयों में इस तरह के आयोजन कराने के लिए संस्था प्रधानों को पाबंद करना होगा। 


दूसरे शनिवार को होगी बाल सभा 


हर महीने के  दूसरे शनिवार को होने वाली बाल सभा में विद्यालय में पढऩे वाले विद्यार्थियों की दादी/नानी अथवा किसी अन्य बुजुर्ग महिला को आमंत्रित किया जाएगा। वे बच्चों के साथ सहज संवाद करते हुए परम्परागत प्रेरक व मनोरंजक कहानियां बच्चों को सुनाने के लिए कार्यक्रम में भाग लेंगी। 


बच्चों को मिलेंगे संस्कार


यह अच्छी पहल है। बालसभा तो पहले भी होती थी, लेकिन दादी/नानी की मनोरंजक कहानियां और संस्कार बच्चों को स्कूलों में पहली बार सुनने को मिलेंगे। यह प्रयास बच्चों में संस्कारित करने में सार्थक सिद्ध होगा। 


शिवजी गौड़ जिला शिक्षा अधिकारी मा.शि. उदयपुर 

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