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बढ़ सकती हैं उमा भारती की मुश्किलें, कोर्ट में पहुंचा मामला

बढ़ सकती हैं उमा भारती की मुशकिलें, कोर्ट में पहुंचा मामला

झांसी

Published: February 25, 2018 01:16:10 pm

बढ़ सकती हैं उमा भारती की मुशकिलें, कोर्ट में पहुंचा मामला

झांसी। केंद्रीय मंत्री और झांसी-ललितपुर क्षेत्र की सांसद उमा भारती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बुंदेलखंड राज्य बनवाने के संबंध में किया गया वादा नहीं निभाना उनको भारी पड़ सकता है। उन्होंने लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा के सत्ता में आने पर तीन वर्ष के भीतर बुंदेलखंड पृथक राज्य का निर्माण करा देने का वादा किया था। इस वादा खिलाफी के कारण उन पर प्रलोभन देकर मतदाताओं को प्रभावित कर उनसे छल कर चुनाव जीतने का आरोप लगाते हुए इस मामले को कोर्ट में ले जाया गया है। इस संबंध में सी जे एम की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर उमा भारती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराये जाने की मांग की गई है।
matter against uma bharti reach in court
नामांकन के बाद जनसभाओं में किया था वादा

बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा अध्यक्ष भानु सहाय ने सी जे एम की अदालत में प्रार्थना पत्र देते हुये कहा है कि उमा भारती ने पृथक बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण के भावनात्मक मुद्दे को हाथों हाथ लिया, और माह अप्रैल 2014 में नामांकन के पश्चात् अधिकांश जन सभाओं में जनता से वादा किया कि चुनाव जीतने के बाद वे तीन वर्ष के भीतर बुंदेलखंड राज्य बनवा देंगी। उमा भारती के राजनैतिक कद को देखते हुए तीन वर्ष के भीतर पृथक राज्य बनवा देने के वादे व प्रलोभन से जनता प्रभावित हुई। आरोप लगाया गया है कि उमा भारती ने जानबूझ कर बेईमानी पूर्वक छल करने व धोखा देने की नीयत से बुंदेलखंड की जनता से पृथक राज्य 3 वर्ष के अन्दर बनवाने का झूठा वादा करके चुनाव जीता। साथ ही तीन वर्ष बीत जाने के पश्चात भी बुंदेलखंड राज्य का निर्माण न करके यहां की जनता के साथ धोखाधड़ी की है।
इन्होंने लगाए आरोप

बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय की ओर से अधिवक्ता रवि शंकर शर्मा, देवी सिंह, अशोक सक्सेना एवं पवन कुमार ने प्रार्थना पत्र में आग्रह किया कि उमा भारती के विरूद्ध मतदाताओं से झूठा वादा कर, छल कर चुनाव जीत लेने व 3 वर्ष आठ माह से ज्यादा का समय गुजर जाने पर वादा पूर्ण नहीं किये जाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज किये जाने का आदेश पारित किया जाए। इस पर न्यायालय ने 28 फरवरी को पुलिस को रिपोर्ट देने के आदेश दिये हैं।

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