scriptNaxal attack in Chhattisgarh: 76 soldiers were martyred in Tadmetla | 10 साल पहले आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला, ताड़मेटला में शहीद हुए थे 76 जवान | Patrika News

10 साल पहले आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला, ताड़मेटला में शहीद हुए थे 76 जवान

locationसुकमाPublished: Apr 06, 2020 10:55:57 pm

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CG Desk

चिंतलनार के जंगलों में एक हजार नक्सलियों ने घेर लिए थे हमारे 150 जवान, फिर हुई थी भीषण मुठभेड़।

10 साल पहले आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला, ताड़मेटला में शहीद हुए थे 76 जवान
10 साल पहले आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला, ताड़मेटला में शहीद हुए थे 76 जवान
बस्तर। छत्तीसगढ़ आज भी नक्सलियों के नाम से जाना जाता है। लोगों के मन से नक्सलियों का खौफ खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आज से ठीक दस साल पहले देश का सबसे बड़ा नक्सल हमला सुकमा जिले के ताड़मेटला में हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे। यह भी कहा जाता है पूरी एक कंपनी खत्म हो गई थी। यह दिन भारतीय इतिहास का वो काला दिन है जिसकी खबर से 6 अप्रैल 2010 को पूरा भारत सहम गया था।
माना जाता है बस्तर में नक्सली 1980 में आए, इसके बाद से अब तक ताड़मेटला में हुए नक्सल वारदात को सबसे बड़ी घटना कही जाती है।यह घटना 6 अप्रैल 2010 की सुबह की है जब अचानक सुकमा से खबर आती है की जिले के चिंतलनार सीआरपीएफ कैंप के पास ताड़मेटला नाम की जगह पर सीआरपीएफ के जवान और नक्सलियों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई है। शुरुआती दौर में केवल कुछ ही जवानों की शहीद होने की खबर आती है लेकिन जैसे जैसे समय गुजरता है रात होते तक वह संख्या बढ़कर 76 हो जाती है।
10 साल पहले आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला, ताड़मेटला में शहीद हुए थे 76 जवानएक हजार नक्सलियों के बीच फंसे थे 150 जवान
हमले में बचे जवानों ने बताया था करीब 1 हजार नक्सलियों ने उन जवानों को घेर लिया था।दरअसल 5 अप्रैल को चिंतलनार सीआरपीएफ कैंप से करीब 150 जवान जंगल में सर्चिंग के लिए निकले हुए थे। सभी जवान घने जंगल में कई किलोमीटर चलने के बाद जब वापस लौट रहे थे तभी 6 अप्रैल की सुबह करीब 6 बजे ये भीषण मुठभेड़ हुई। नक्सलियों ने बड़ी चालाकी से ताड़मेटला और चिंतलनार के बीच सड़क पर लैंडमाइन बीछा रखा था और बीच में पड़ने वाली छोटी पुलिया को भी बम से उड़ा दिया था।इस मुठभेड़ में जवानों ने शुरुआत में नक्सलियों को अच्छा जवाब दिया और 8 बड़े नक्सलियों को मार गिराया था लेकिन पास की पहाड़ी से शुरू हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी में जवान बुरी तरह घिर गए और कई जवान शहीद हुए तो कई गंभीर रूप से घायल।
कुख्यात बस्तर में अब तक का सबसे बड़ा हमला
नक्सलियों का शुरू में जोर वन अधिकार, जल,जंगल की लड़ाई के लिए आदिवासियों को लामबंद करने पर रहा। वे वन कर्मियों की पिटाई करते लेकिन जब जनता का समर्थन मिलने लगा तो उनका खूनी खेल शुरू हुआ। नक्सलियों ने पहली बड़ी वारदात बीजापुर जिले के तर्रेम में की थी। ब्लास्ट में जवानों की हत्या की। बस्तर में इसके बाद नक्सल हमलों का सिलसिला शुरू हुआ जो अब तक जारी है।
वर्ष 1995 में उन्होंने नारायणपुर जिले में पुलिस की एक वैन उड़ा दी जिसमें एक डीएसपी समेत 25 जवान शहीद हुए थे। ताड़मेटला के अलावा 2008 में बीजापुर जिले के रानीबोदली गांव में फोर्स के कैंप को उन्होंने निशाना बनाया जिसमें 55 जवान शहीद हुए थे। 2003 में उन्होंने गीदम थाने पर हमला किया था और एक जवान की हत्या कर हथियार लूट ले गए थे।
10 साल पहले आज ही के दिन हुआ था देश का सबसे बड़ा नक्सली हमला, ताड़मेटला में शहीद हुए थे 76 जवानसलवा जुड़ूम का आतंक
2005 में सलवा जुड़ूम शुरू होने के बाद तो नक्सल हमलों की बाढ़ आ गई। उन्होंने जनता पर भी हमले किए। 2006 में एर्राबोर कैंप पर हमला कर 35 आदिवासियों को मार दिया। इसी साल सलवा जुड़ूम की रैली से लौट रहे ग्रामीणों की ट्रक उड़ा दी जिसमें 25 मारे गए। इसी दौरान उपलमेटा में हमला कर 22 जवानों की हत्या कर दी। सुकमा जिले के कोंटा ब्लॉक के बंडा इलाके में नगा फोर्स की गाड़ी उड़ा दी जिसमें 14 जवान मारे गए। 2008 में ही बैलाडीला की हिरोली माइंस पर हमला कर सीआईएसएफ के आठ जवानों की हत्या कर 20 टन बारूद लूट ले गए। छुटपुट घटनाएं तो रोज हो रही हैं।
झीरम घाटी कांड
वर्ष 2013 में उन्होंने अब तक का सबसे बड़ा हमला राजनीतिक दल कांग्रेस पर किया। झीरम घाट में कांग्रेस के काफिले को एंबुश में फंसाया। इस हमले में 31 लोगों की मौत हुई जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ला, तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा शामिल थे।
हाल ही में नेता और कई जवान भी हुए शहीद
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने दंतेवाड़ा के भाजपा विधायक भीमा मंडावी और उनके चार सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी। 24 अप्रैल 2017 को सुकमा जिले के बुरकापाल गांव में सीआरपीएफ की टीम पर हमला किया जिसमें 25 जवान शहीद हुए थे। 2018 में भेज्जी में फोर्स की गाड़ी को विस्फोट से उड़ाया जिसमें नौ जवान शहीद हुए।

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