नक्सलियों के तोड़े पुल को 10 साल बाद फोर्स ने कराया चालू

2006 में तोड़ा गया था पुल जिसके बाद जगरगुंडा मार्ग हुआ था टापू में तब्दील, सीआरपीएफ  ने किया था पहल बाद चालू हुआ निमार्ण कार्य

By: Ajay shrivastava

Published: 10 Nov 2016, 11:36 PM IST

दोरनापाल. नक्सलियों द्वारा 2006 में सलवा जुडूम के वक्त जगरगुंडा चिंतलनार मार्ग पर स्थित मलेबाग पुल को बुरी तरह से छतिग्रस्त कर दिया गया था। इसके चलते जगरगुंडा टापू में बदल गया था।

लोगों को आने जाने के लिए जान जोखिम में डाल कर पार करना पड़ता था। इसके साथ ही बाइक जैसे वाहनों को पार करने में काफी परेशानीहोती थी साथ बारिश के दिनों में तो पार करना ही मुश्किल हो जाता था।

चिंतलनार से तीन किमी दुरी पर स्थित मलेबाग पुल हकीकत में जगरगुंडा जाने के लिए एक बड़ा रोड़ा साबित हो रहा था वहीं राशन पहुंचाने में भी प्रशासन के पसीने छूट जाया करते थे।

पुल टूट जाने की वजह से अक्सर बारिश में पानी काफी बढ़ जाता था। इसके बाद पुल पार कर पाना नामुमकिन हो जाता था। और पुल इतना बुरी तरह से छतिग्रस्त था की उसके ऊपर से भी पार नही हुआ जा सकता था। मगर अब पुल पर से भारी वाहन भी गुजर सकते है। और मरीजों को जल्द स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती है।

सीआरपीएफ  की पहल पर पुल बन कर तैयार
चिंतलनार एनरसापुरम और जगरगुंडा में स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 74वीं वाहिनी के कंपनी में राशन पहुंचाने में काफी परेशानियों को सामना करना पड़ता था।

स समस्या को देखते हुए वाहिनी के द्वितीय कमान अधिकारी विनोद कुमार ने ठेकेदार की मदद से पुल को फिर से चलने योग्य बनवा दिया। पुल के चालू होने से आमजन भी वहां पहुंच कर आभार प्रकट किया।

फिरोज कुजूर : कमाण्डेंट, 74 वाहिनी : बस अभी  चिंतलनार तक जाती थी। वह जगरगुंडा भी जा सकती है, पहले मलेबाग पुल के कारण जाना काफी मुश्किल था मगर अब जगरगुंडा भी जाया जा सकता है। और वहां रह रहे लोगों को सुविधा पहुंचाई जा सकती है।
Ajay shrivastava
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