यहां है 5 हजार साल पुराना अघोरपंथियों का तीर्थस्थल, गुरु पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में देश-विदेश से पहुंचते हैं भक्त

यहां है 5 हजार साल पुराना अघोरपंथियों का तीर्थस्थल, गुरु पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में देश-विदेश से पहुंचते हैं भक्त

Hariom Dwivedi | Publish: Jul, 14 2019 03:05:25 PM (IST) Sultanpur, Sultanpur, Uttar Pradesh, India

- आध्यात्मिक, राजनैतिक और साहित्यक खूबियों के कारण यह क्षेत्र देश में अलग पहचान रखता है
- अघोरपंथियों का करीब पांच हजार साल पुराना तीर्थस्थल है अघोर पीठा बाबा सत्यनाथ मठ
- सुलतानपुर जिले के कादीपुर में गोमती नदी के तट पर स्थित है यह मठ

सुलतानपुर. जिले के कादीपुर स्थित अघोर पीठा बाबा सत्यनाथ मठ में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक धरोहर छिपे हैं। अपनी आध्यात्मिक, राजनैतिक और साहित्यक खूबियों के कारण यह क्षेत्र देश में अलग पहचान रखता है। यह मठ कादीपुर चौराहे से चांदा मार्ग पर अल्देमऊ नूरपुर गांव में आदि गंगा गोमती के पावन तट पर स्थित है। मठ अघोरपंथियों का करीब पांच हजार साल पुराना तीर्थस्थल है, जहां गुरु पूर्णिमा पर देश विदेश में बसे भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

अघोरियों का यह प्रमुख साधना केंद्र अब भी बहुत से रहस्य समेटे हुए है। वर्षों पहले वीरान पड़े इस शैव साधना स्थल पर हरिश्चंद्र घाट काशी के श्मशान पीठ के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चंडेश्वर कपाली बाबा ने आकर पुरातात्विक महत्व के इस स्थान का पुनः पुराने गौरव को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं। अवधूत उग्र चंडेश्वर कपाली बाबा ने इस स्थान का रहस्योघाटन करते हुए बताया कि यह स्थान शैव साधना का अति प्राचीनतम स्थान है। मैंने अपने साधना और तप के माध्यम से जो जानकारी प्राप्त की है, वह यह है कि यह स्थान अघोर परम्परा के नव नाथों में प्रथम नाथ ब्रम्हा के अवतार बाबा सत्यनाथ की साधना व समाधि स्थल है। लगभग 5000 साल पुराना महाभारत काल का स्थल अघोरियों के साधना का प्रमुख स्थल है। शैव साधक और अन्य जनसामान्य के लिए यह स्थान किसी भी तीर्थ से कम नहीं है।

बाबा सत्यनाथ ने बसाया
कादीपुर नामक स्थान भी बाबा सत्यनाथ के द्वारा बसाया गया है, क्योंकि अघोर परम्परा में साधना की 5 धाराएं हादि, कादि, ओमादी, वागादि, प्रणवादि के माध्यम से अघोर साधक अपने स्तर से साधनाएं करता है। बाबा सत्यनाथ कादिधारा के प्रवर्तक थे। बाबा के द्वारा बसाये गए गांव या नगर कादीपुर कहलाए इस स्थान पर अभी भी कादिधारा यन्त्र विद्यमान है जो आम जन के दर्शनार्थ मंदिर में शिवलिंग और अर्घा के रूप में रखा गया है।

प्राचीनकाल का युद्धस्थल है यह स्थान
इस क्षेत्र में अघोर परम्‍परा के नव नाथों में प्रथम नाथ ब्रम्हा के अवतार जिनका स्वरूप जल है। ऐसे अघोराचार्य बाबा सत्‍यनाथ के बारे में अनेक चमत्कारिक किंवदन्तिया, कहानियां आदि अभी भी गावों में प्रचलित हैं। इस साधना स्थल पर अनेक सिद्ध सन्यासियों, अघोरियों ने साधना करके पराशक्तियों को अर्जित कर अपने जीवन को सुगम व सरल बनाया है। पुरातात्विक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह स्थान प्राचीनकाल का युद्धस्थल है। यह स्थान अल्देमऊ भरो के शासनकाल में प्रतापी भर राजा अल्दे की राजधानी हुआ करती थी।

आज भी दिखती हैं किले की दीवारें
इसका प्रमाण यहां खंडहर में परिवर्तित किला व किले की दीवारें आदि आज भी दिखाई दे रही हैं। भौगोलिक स्थिति के आंकलन मे 90 अंश के कोण पर मुड़ी आदि गंगा गोमती व इस मठ के इर्द गिर्द बड़े बड़े टीले शांत वातावरण साधना क्रम में ऊर्जा प्रदान करते ही हैं। वहीं, दूसरी तरफ पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थल महत्वपूर्ण है।

किया जा रहा है विकसित
उऩ्होंने बताया कि अब इसे विकसित किया जा रहा है, आने वाले समय में सुल्तानपुर जनपद का यह शैव साधना केंद्र जनपद में ही नहीं पूरे देश में अपनी एक पहचान बनेगा। आज भी अनेक विदेशी शैव साधकों सहित देश के शैव साधक / अघोरी अघोरपीठ बाबा सत्यनाथ मठ के पीठाधीश्वर अवधूत कपाली बाबा को साधना की प्रतिमूर्ति मानकर आये दिन इस स्थान पर साधना रत देखे जाते हैं। पुरातात्‍विक एवं अध्यात्मिक महत्व का यह स्थान फिलहाल सरकारी सुविधाओं से वंचित है पर्यटन की असीम संभावना वाला यह क्षेत्र आज विकास की बाट जोह रहा है।

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