सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा को बताया था असंवैधानिक, फिर भी दर्ज हो गया मुकदमा, तफ्तीश पर उठा सवाल

सीएम का ओएसडी बनकर डीएम को धमकाने के मामले में पुलिस का कारनामा, मुकदमा दर्ज करने के अलावा पुलिस ने इसी धारा में आरोपी को भेजा है जेल, तफ्तीश पर उठा सवाल.

By: Abhishek Gupta

Published: 10 Jan 2019, 05:41 PM IST

Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

सुलतानपुर. पुलिस ने एक मामले में ऐसी धारा का इस्तेमाल किया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के जरिए पहले ही असंवैधानिक करार दिया जा चुकी है। मामला हाई-प्रोफाइल है और डीएम से जुड़ा है, लेकिन पुलिस ने इस धारा को आरोपी के खिलाफ इस्तेमाल किया है, जिसके बाद से ही पुलिस की तफ्तीश पर सवाल खड़े हो रहे है।

ये भी पढ़ें- अवैध खनन मामले में अखिलेश ने भाजपा का ही पेंतरा इस्तेमाल कर किया हमला

पुलिस की कार्यवाही पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल-

मालूम हो कि जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. वीबी सिंह के खिलाफ स्टाफ नर्स कीर्ति श्रीवास्तव व जरीना बानो ने गंभीर आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की थी। जिसकी जांच के लिए डीएम ने आदेश दिए थे। इसी के बाद ही बीते 23 नवम्बर को डीएम के सीयूजी नंबर पर एक मोबाइल (9453150300) से फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम धर्मेंद्र चौधरी बताते हुए खुद को मुख्यमंत्री का विशेष कार्याधिकारी बताया। आरोप है कि फोन करने वाले व्यक्ति ने अपने पद की धौस जमाते हुए स्टाफ नर्सों के जरिए सीएमएस के खिलाफ हुई शिकायत को फर्जी बताया और प्रस्तावित जांच की कार्यवाही को तत्काल समाप्त करने के लिए भी कहा।

ये भी पढ़ें- पहली बार एक ही पोस्टर में दिखे अखिलेश-मायावती, साथ ही लिखा कुछ ऐसा, नहीं गया इसपर किसी का ध्यान

शक होने पर डीएम ने सीएम कार्यालय में फोन कर जानी हकीकत-

फोन करने वाले की बात सुनकर संदेह होने पर डीएम ने जब इस बात की पुष्टि करने के लिए सीएम के विशेष कार्याधिकारी धर्मेन्द्र चौधरी की मोबाइल पर वार्ता की तो उनके जरिए इस प्रकार से की गयी किसी भी वार्ता पर अनभिज्ञता जतायी गयी। मामले में जिलाधिकारी विवेक के निर्देश पर डीएम कंट्रोल रूम के कैंप सहायक राकेश कुमार के जरिए कोतवाली में तहरीर दी गयी। जिस पर अज्ञात मोबाइल धारक के खिलाफ भादवि की धारा 420 व 66 ए आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया। तफ्तीश के दौरान पुलिस ने आरोपी अंकेश कुमार निवासी दादूपुर-धम्मौर को 24 दिसम्बर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस दौरान भी विवेचक के जरिए आरोपी के खिलाफ 420 के अलावा धारा 419 भादवि की बढ़ोत्तरी कर एवं 66 ए आईटी एक्ट के आरोप में जेल भेजा गया है।

अधिवक्ता ने दिया बयान-

मामलें में अधिवक्ता श्रीकांत पांडे की माने तो जिस धारा-66 ए आईटी एक्ट को पुलिस ने इस्तेमाल कर आरोपी अंकेश को जेल भेजा है, उस धारा को काफी पहले ही सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक करार दे चुका है। बावजूद इसके इस धारा को आरोपी के खिलाफ किन परिस्थितियों में पुलिस ने लगाया है, इसका सटीक जवाब भी पुलिस के पास नहीं है।

विवेचक ने दिया गोलमोल जवाब-

 

असंवैधानिक करार दिये जाने के बावजूद धारा-66 ए आईटी एक्ट लगाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही का नियम भी बताया गया है। विवेचक से धारा-66 ए आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने के बाद उसी धारा में आरोपी को जेल भेजने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए बाद में सुधार कर लेने की बात कही है।

अभियोजन अधिकारी ने दिया बयान-

 

अभियोजन अधिकारी विजय कुमार सरोज से भी धारा-66 ए आईटी एक्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने भी इस धारा को सुप्रीम कोर्ट के जरिए असंवैधानिक करार दिये जाने की बात कहते हुए उसे किसी पर लगाए जाने को गलत बताया। वहीं देखा जाय तो इस मामले में अंकेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्यवाही ठप सी हो गयी है। जबकि मामला कोई आम नहीं बल्कि डीएम से लेकर सीएम के ओएसडी की विश्वसनीयता व सम्मान से जुड़ा है। माना ये जा रहा कि फोन करने अथवा कराने के पीछे डा. वीबी सिंह का ही लाभ जुड़ा हुआ था। ऐसे में आखिर और कौन डीएम के पास जांच प्रभावित करने के लिए फोन करेगा अथवा कराएगा।

BJP
Show More
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned