आज सिर्फ 2 घंटे है गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त, भगवान श्रीकृष्ण को ऐसे करें खुश

आचार्य सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि गोवर्धन पूजा या अन्नकूट की पूजा दीपावली के अगले दिन की जाती है

By: Hariom Dwivedi

Published: 15 Nov 2020, 03:47 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

सुलतानपुर. दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। द्वापरयुग से चली आ रही इस परम्परा में गोवर्धन पर्वत की पूजा के अलावा भगवान कृष्ण और गायों की पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाना अति शुभ माना जाता है। इस शुभ त्यौहार की जानकारी आचार्य सतीश कुमार पांडेय ने दी।

आचार्य सतीश कुमार पांडेय ने बताया कि गोवर्धन पूजा या अन्नकूट की पूजा दीपावली के अगले दिन की जाती है। उन्होंने बताया कि इस बार दीपावली का त्यौहार 24 नवंबर को मनाया गया, इसलिए गोबर्धन पूजा 15 नवंबर को पड़ रहा है। आचार्य ने बताया कि प्रतिपदा तिथि 15 नवंबर 2020 को सुबह 10 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ हो रहा है और प्रतिपदा तिथि 16 नवंबर 2020 को सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। इसलिए जरूरी यह है कि लोग गोवर्द्धन पूजा सांयकाल मुहूर्त 15 नवंबर 2020 को दोपहर 03 बजकर 19 मिनट से शाम 05 बजकर 27 मिनट तक, यानी कुल 02 घंटे 09 मिनट के बीच करें तो शुभ फलदायी रहेगा।

ऐसा करने से साल भर बनी रहती है श्रीकृष्ण कृपा
गोवर्धन पूजा करने के लिए घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाएं। इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल और दीपक जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें। कहा जाता है कि इस दिन विधि विधान से सच्चे दिल से गोवर्धन की पूजा करने से सालभर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बनी रहती है।

गोवर्धन पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा
सबसे पहले द्वापरयुग में भगवान श्री कृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा मथुरा बृंदावन आदि स्थानों पर हुई थी। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। गाय के गोबर से इसलिए क्योंकि पुराणों में इसे पवित्र माना जाता है। ग्रंथों में बताया गया है कि गाय के गोबर में भी लक्ष्मी का निवास होता है। इसलिए सुख और समृद्धि के लिए भी गोवर्धन पूजा करने की परंपरा है। इस दिन गायों की सेवा का महत्व है।

गोवर्धन की पूजा के बाद करें दान
आचार्य ने बताया कि सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल की मालिश करके नहाना चाहिए। घर के आंगन पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं। इस पर्वत के बीच में या पास में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रख दें। अब गोवर्धन पर्वत और श्री कृष्ण की पूजा करें और मिठाइयों का भोग लगाएं। देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करें। पूजा के बाद कथा सुनें। ब्राह्मण को भोजन करवाकर उसे दान-दक्षिणा दें।

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