रिहा होगा हिस्ट्रीशीटर, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका को चुनौती देने वाली याचिका

रिहा होगा हिस्ट्रीशीटर, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका को चुनौती देने वाली याचिका

Hariom Dwivedi | Publish: Sep, 11 2018 12:40:17 PM (IST) Sultanpur, Uttar Pradesh, India

अदालत के इस आदेश से हिस्ट्रीशीटर के जमानत को चुनौती देने वाले अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका लगा है...

सुलतानपुर. गांजा बरामदगी मामले में राहत पाये हिस्ट्रीशीटर के जमानत आदेश को चुनौती देने संबंधित जमानत कैंसिलेशन अर्जी को अपर जिला जज प्रथम रामपाल सिंह की अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने पूर्व के जमानत आदेश को जायज बताया है। अदालत के इस आदेश से हिस्ट्रीशीटर के जमानत को चुनौती देने वाले अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका लगा है।

मामला कोतवाली नगर क्षेत्र के रामनगर कोट निवासी हिस्ट्रीशीटर जितेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना से जुड़ा है, जिसे कुछ दिनों पहले नगर पुलिस ने गांजा बरामदगी मामले में जेल भेजने की कार्रवाई की थी। कुछ दिनों पहले इस मामले में जितेन्द्र सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई के पश्चात एडीजे प्रथम आरपी सिंह की अदालत ने उसे राहत देते हुए अर्जी स्वीकार कर ली। चर्चा यह रही कि अभियोजन पक्ष हिस्ट्रीशीटर के खिलाफ आपराधिक इतिहास के ब्यौरे को पेश नहीं कर सका। नतीजतन उसे अदालत से राहत मिल गयी। हिस्ट्रीशीटर को अभियोजन की कमी से राहत मिलने की खबर जिला प्रशासन को नगवार गुजरी। नतीजतन जिला प्रशासन के हस्तक्षेप पर जमानत आदेश को शासकीय अधिवक्ता तारकेश्वर सिंह ने चुनौती देते हुए जमानत निरस्त करने की मांग की। शासकीय अधिवक्ता का आरोप रहा कि सुनवाई के दौरान उन्होंने पुलिस के जरिये भेजे गये आपराधिक इतिहास की सूची पेश की थी और बकायदा उस पर बहस भी हुई थी। यहां तक कि बचाव पक्ष के जरिये भी आपराधिक इतिहास के बिन्दु पर लम्बी बहस करने की बात बताई गयी। बावजूद इसके जमानत आदेश में हिस्ट्रीशीटर जितेन्द्र सिंह के आपराधिक इतिहास का तनिक भी जिक्र ही नहीं किया गया।

स्टेनों ने लिपकीय त्रुटि बताया
जमानत आदेश को मिले चुनौती संबंधी प्रकरण को जिला जज ने अपर जिला जज प्रथम की अदालत पर ही सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया। जमानत आदेश में क्रिमिनल हिस्ट्री न दर्शाये जाने के पीछे आशु लिपिक गनेश कुमार पाठक ने लिपिकीय त्रुटि की वजह बताई एवं अपनी गलती भी मानी। वहीं, शासकीय अधिवक्ता तारकेश्वर सिंह ने अपने तर्कों को पेश कर जमानत आदेश को निरस्त करने की मांग की एवं क्रिमिनल हिस्ट्री रहने पर बेल न दिए जाने के समर्थन में विधि व्यवस्था भी पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत के पूर्व आदेश को जायज बताते हुए जमानत कैंसिलेशन अर्जी खारिज करने की मांग की । उभय पक्षों को सुनने के पश्चात सत्र न्यायाधीश रामपाल सिंह ने आशु लिपिक की त्रुटि एवं दोनों पक्षों के तर्कों को दृष्टिगत रखते हुए पूर्व में पारित अपने जमानत आदेश को जायज मानते हुए जमानत कैंसिलेशन अर्जी खारिज कर दी । अदालत के इस आदेश से सरकार पक्ष को गहरा झटका लगा है। इस संबंध में शासकीय अधिवक्ता तारकेश्वर सिंह का कहना है कि अदालत के आदेश का अवलोकन कर इसे चुनौती देने पर विचार किया जायेगा। अब देखना है कि हिस्ट्रीशीटर की जमानत को चुनौती देने वाला अभियोजन पक्ष अदालत के इस आदेश को बड़ी अदालत में चुनौती देता है या फिर अपनी हार में ही संतोष कर चुप बैठ जाता है।

Ad Block is Banned