मासूम की लाश ले जाने के लिए नहीं मिला शव वाहन, अंत में लेना पड़ा रिक्शा

जिले में स्वास्थ्य सेवाएं इस कदर खराब है कि धरती पर भगवान का रूप बनकर बैठे डाक्टरों से मां-बाप अपने मासूम बच्चे की लाश घर तक ले जाने के लिए शव वाहन मुहैया कराने की मिन्नतें करते रहे।

By: Abhishek Gupta

Updated: 30 Sep 2020, 04:10 PM IST

सुलतानपुर. जिले में स्वास्थ्य सेवाएं इस कदर खराब है कि अस्पताल से शव को ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध नहीं है। अंत में गरीबी की मार झेल रहे माता-पिता को बैट्री रिक्शा करके शव को गांव ले जाना पड़ा। मामला सुल्तानपुर जिला अस्पताल का है। सोमवार की रात यहां कुड़वार थाना क्षेत्र के रामनगर गांव के पति-पत्नी बुखार से तप रहे अपने मासूम बच्चे को 108 एंबुलेंस से लेकर इलाज कराने पहुंचे थे। साथ आए पड़ोसी सुनील कुमार ने बताया कि डॉक्टर ने बच्चे को देखते ही मृत घोषित कर दिया। पड़ोसी सुनील ने एंबुलेंस चालक से शव ले जाने के लिए कहा। आरोप है कि एंबुलेंस चालक ने कहा हम जीवित लोगों को लेकर जाते हैं, मुर्दा को नहीं। गरीब मां-बाप ने प्राइवेट एम्बुलेंस से कलेजे के टुकड़े का शव ले जाने की हिम्मत जुटाई तो उसने पैसों की डिमांड इतनी कर दी के वो उसे पूरा करने में लाचार नजर आए। अंत में रिक्शा कर से शव को वह घर ले गए

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सीएमओ ने कहा, नहीं है मामले की जानकारी

जिले में स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार अधिकारी सीएमओ सुलतानपुर डॉक्टर सीबीएन त्रिपाठी ने मामले की जानकारी होने से ही इनकार किया। सवाल यह है कि जब अधिकारी नींद में मस्त हैं तो सिस्टम पटरी पर कैसे आएगा। हैरत की बात यह है कि सांसद रहते हुए वरुण गांधी ने अस्पताल की इमरजेंसी में करोड़ों रुपए के उपकरण दिए थे, तो वहीं वर्तमान सांसद मेनका गांधी यहां बड़े पैमाने पर सामान और एंबुलेंस उपलब्ध करा चुकी हैं।

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