भारतीय जनता पार्टी नहीं, सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के सामने यह है सबसे बड़ी चुनौती!

भारतीय जनता पार्टी नहीं, सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के सामने यह है सबसे बड़ी चुनौती!

Hariom Dwivedi | Updated: 11 Mar 2019, 03:18:12 PM (IST) Sultanpur, Sultanpur, Uttar Pradesh, India

सपा-बसपा-रालोद के संयुक्त सम्मेलन में भी एक नहीं हो सके गठबंधन कार्यकर्ता, दिखे बगावत के सुर...

सुलतानपुर. लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। सीटें भी बंट चुकी हैं, लेकिन प्रत्याशियों की घोषणा अभी होना अभी बाकी है। जिलों में संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन किये जा रहे हैं, जिसमें तीनों दलों के कार्यकर्ता व नेता शामिल हो रहे हैं। सबकी मौजूदगी में गठबंधन प्रत्याशियों का एलान किया जाना है। इसी आशय से सुलतानपुर के खुर्शीद क्लब में भी पहली बार सपा-बसपा और रालोद का खुर्शीद क्लब में संयुक्त सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच बनी दूरी से गठबंधन की गांठ ढीली पड़ती दिखाई दी। इसके चलते जहां प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हो सकी, वहीं निचले स्तर पर गठबंधन की हकीकत भी खुलती दिखी।

संयुक्त महासम्मेलन में रालोद के कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने सम्मेलन से खुद को दूर रखा था। पूरे सम्मेलन में राष्ट्रीय लोकदल का एक भी कार्यकर्ता नजर नहीं आया। वहीं, समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद ताहिर खां सम्मेलन में अपनी उपेक्षा से इस कदर नाराज हो गए कि वह मंच से उतर कर जाने लगे तो उन्हें कुछ लोगों ने मनाकर वापस मंच पर बैठाया, अंत तक उनकी नाराजगी बनी रही। इतना ही नहीं है जिले में गठबंधन के इकलौते सपा विधायक अबरार अहमद खान तो सम्मेलन के इर्द-गिर्द भी नहीं दिखे। यह सब सम्मेलन के मुख्य अतिथि व बसपा के पूर्व सांसद एवं मुख्य जोनल कवार्डिनेटर त्रिभुवन दत्त और बसपा के पूर्व सांसद (अब सपा नेता ) मोहम्मद ताहिर खान की मौजूदगी में यह सब हुआ।द भी नहीं दिखाई दिये।

 

सपा-बसपा गठबंधन में सुलतानपुर संसदीय सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है। हाल ही में भाजपा से बसपा में शामिल हुए इसौली के पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह 'सोनू' को गठबंधन का प्रत्याशी माना जा रहा है। इसे लेकर समर्थकों ने जश्न की तैयारियां भी कर ली थीं, लेकिन ऐन मौके पर प्रत्याशी का ऐलान टाल दिया गया। बसपा के मुख्य जोनल क्वार्डिनेटर त्रिभुवन दत्त ने कहा कि पार्टी कई नामों पर विचार कर रही है। अभी पार्टी प्रत्याशी के नाम की घोषणा करना ठीक नहीं होगा।

 

सम्मेलन के आयोजकों ने मुझे आमंत्रित नहीं किया था और न ही पार्टी का झंडा लगाया। यह पार्टी का अपमान और गठबंधन धर्म के खिलाफ है।
बेलाल अहमद एडवोकेट, रालोद जिलाध्यक्ष

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