होली मिलन के बहाने जोर आजमाइश करेंगे पूर्व विधायक पवन पांडेय

प्रदेश के फायर ब्रांड नेता बाहुबली पवन पांडे की अध्यक्षता में होली मिलन समारोह व कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया है।

सुल्तानपुर. शनिवार को जिले के प्रसिद्ध धाम बिजेथुआ महावीरन में पूर्व विधायक व प्रदेश के फायर ब्रांड नेता बाहुबली पवन पांडे की अध्यक्षता में होली मिलन समारोह व कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के बहाने लोकसभा चुनावों में जोर आजमाइश का इरादा जताया जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल होने व भारी भीड़ जुटाने को लेकर जिले भर में फैले समर्थक तैयारी में जुट गए हैं । जनपद के कोने कोने से कार्यकर्ताओं व समर्थकों के पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की जा रही है । जानकार सूत्र बताते है कि ताकत के प्रदर्शन के बल पर सुल्तानपुर लोकसभा चुनावों में नए समीकरण बनना तय है । पवन पांडेय के चुनाव लड़ने की संभावित घोषणा के मद्देनजर जिले के राजनैतिक पंडित सभी घोषित प्रत्याशियो के नफा नुकसान के आकलन में लग गए हैं ।


कौन बनेगा तीसरा विकल्प

सत्ताधारी भाजपा व गठबंधन के बाद तीसरे विकल्प के रूप में *बाहुबली पवन पांडेय* ,जिले में अपने हजारो समर्थकों व लाखो सजातीय वोट बैंक व तेज तर्रार छवि से लीड करते है या ,गांधी परिवार की बेटी प्रियंका गांधी के तूफानी अंदाज के बाद तेजी से वापसी को बेताब कांग्रेस अपने जमाने के प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता *राज्यसभा सांसद ,डॉ संजय सिंह*, उनकी सैकड़ो कर्मचारियो ,इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी ( crew )जिले के कांग्रेस जनों के साथ शानदार भाषणों के लिये जानी जाने वाली पत्नी डॉ अमिता सिंह के साथ सब ओर से भारी पड़ने वाली है । वंही समाजवादी पार्टी से अलग शिवपाल की अध्यक्षता में बनी पार्टी की उम्मीदवार *जिपंस कमला यादव* सिम्पैथी ,जुझारू प्रवृत्ति ,सजातीय मतदाताओं का साथ यादव सेना का समर्थन गठबंधन प्रत्याशी के विरोध का लाभ लेते हुए विकल्प बनती है यह भविष्य के गर्त में है । फिलहाल जिले का चुनाव कड़ी प्रतिद्वंदिता के साथ रोमांच की ओर बढ़ता जा रहा है आगे कौन लीड करेगा आने वाले सप्ताह में साफ होना शुरू होगा । फिलहाल गठबंधन प्रत्याशी चन्द्र भद्र सिंह सोनू एक चुनो दो पाओ के फार्मूले पर चलते हुए भाजपा वोटो में सेंधमारी में जुट गए है ।

जिले ने राष्ट्रीय नेताओ को किया है निराश
इतिहास के टोटके को मेनका गांधी तोड़ पाएगी यह संशय तो 23 मई को ही पता चलेगा पर अभी तक वीआईपी नेताओ को जिले ने निराश ही किया है । चाहे गोविंद बल्लभ पंत रहे चाहे ,दीपाकौल चाहे ,रीता बहुगुणा ,चाहे कैप्टन सतीश शर्मा सभी को यहां करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी । अब गांधी परिवार की बहू व संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी वरुण गांधी के बाद इस मिथक को तोड़ पायेगी यह भी देखना दिलचस्प होगा ।अंदरूनी सूत्र तो बता रहे कि भाजपा में सब ठीक नही है एक बड़ा धड़ा धीरे धीरे गठबंधन प्रत्याशी की ओर बढ़कर भितरघात की तैयारी में है इसे रोकना संगठन व प्रत्याशी श्रीमती गांधी के लिए बड़ी चुनौती होगी ।

आकांक्षा सिंह
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