विजिलेंस अधिकारी ने होस्टल की जांच के लिए गठित की टीम, 20 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने के दिए आदेश

विजिलेंस अधिकारी ने होस्टल की जांच के लिए गठित की टीम, 20 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने के दिए आदेश

Neeraj Patel | Updated: 03 Aug 2019, 01:59:25 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

बिजिलेंस अधिकारी ने हास्टल का स्थलीय निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट देने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है।

सुलतानपुर. पूर्व सहायक नाजिर पर लगे अवैध तरीके से सम्पत्ति जुटा लेने समेत अन्य गम्भीर आरोपों से जुड़े मामले में बिजिलेंस अधिकारी ने हास्टल का स्थलीय निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट देने के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय आनन्द प्रकाश ने आगामी 20 अगस्त तक समिति को जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

जानें क्या है पूरा मामला

विदित हो कि शिकायतकर्ता बेलाल अहमद एडवोकेट ने जिला न्यायालय के पूर्व सहायक नाजिर विजय गुप्ता के खिलाफ भ्रष्टाचार के सहारे करोड़ों की सम्पत्ति अवैध तरीके से जुटा लेने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से शिकायत की। प्रकरण की जांच कई महीनों से फैमिली कोर्ट जज व बिजिलेंस अधिकारी आनन्द प्रकाश कर रहे हैं। बेलाल अहमद ने कई पेशियों पूर्व सहायक नाजिर व उनकी पत्नी से जुड़े 34 बैंक खातों का हवाला देते हुए तिथिवार ब्यौरा तलब करने एवं हास्टल की जांच कराने की मांग की थी। जिसके सम्बंध में विजय गुप्ता के जरिये सटीक जवाब पेश करने के बजाय महज खानापूर्ति की गई थी। जिस पर बेलाल अहमद ने आपत्ति जताई और तिथिवार बैंक खातों का ब्यौरा तलब करने व हास्टल की जांच कराने की पुनः मांग की।

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बेलाल अहमद की मांग पर जांच अधिकारी आनन्द प्रकाश ने हास्टल की जांच के लिए न्यायिक कर्मी केके मालवीय के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। उन्होंने आगामी 20 अगस्त तक हास्टल के सम्बंध में सम्पूर्ण बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

इस मामले में जिम्मेदारों ने नहीं ली कोई रुचि

 

शिकायतकर्ता के मुताबिक पूर्व सहायक नाजिर विजय गुप्ता को तत्कालीन प्रशासनिक न्यायामूर्ति ने जांच जारी रहने तक अन्य जनपद में स्थानान्तरित करने के सम्बंध में निर्देशित किया था। फिर भी इस आदेश का अनुपालन नहीं हो सका, यह अहम सवाल बना है। शिकायतकर्ता ने बताया कि जिम्मेदारों ने इस सम्बंध में कोई खास रूचि नहीं ली है। जिसके सम्बन्ध में मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के पास भी भेजा गया है। इसके अलावा गोपनीय जांच की पत्रावली से छेड़छाड़, कुछ रिटायर्ड कर्मियों के जरिये विभागीय सम्बंध का फायदा उठाकर अब भी अदालती कार्यों में हस्ताक्षेप कर जांच को प्रभावित करने एवं शिकायतकर्ता को मार डालने की धमकी दिलाने का भी आरोप लगा है।

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शिकायतकर्ता को नहीं मिली सुरक्षा

फिलहाल अभी तक सूचना के बाद भी पुलिस महकमें ने शिकायतकर्ता को किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं प्रदान की है। किसी प्रकार की अनहोनी होने पर बेलाल अहमद ने पूर्व सहायक नाजिर विजय गुप्ता व प्रशासन को पूर्ण रूप से जिम्मेदार होने की बात कही है। इन कार्रवाईओं से पूर्व सहायक नाजिर की समस्याएं किसी तरह से कम होती नहीं दिख रही है। चर्चा यह है कि न्याय विभाग में भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायत पर अन्य मामलो में शीघ्र ही कड़ा एक्शन लिया जाता है, लेकिन इस मामले में वह शख्ती क्यों नही, यह भी अहम सवाल है।

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