आम की बौर के लिए बेहद नुकसानदायक है बदलता मौसम, कृषि वैज्ञानिक ने बताये बचाव के उपाय

मौसम साफ होने और गुनगुनी धूप होने के साथ ही आम के पेड़ों में बौर आ गये हैं फिर वह चाहे देशी आम के पेड़ हों या फिर कलमी।

By: Hariom Dwivedi

Updated: 01 Mar 2020, 02:53 PM IST

सुलतानपुर. मौसम साफ होने और गुनगुनी धूप होने के साथ ही आम के पेड़ों में बौर आ गये हैं। वह चाहे देशी आम के पेड़ हों या फिर कलमी। लेकिन, बदलता मौमस आम के बौर के लिए नुकसान दायक है। बदली और पुरवा हवाएं चलने के कारण आम के बौरों में कीट लगने का खतरा बढ़ गया है, जिसके बौर में लासा लग जाता है। इससे आम के बौर में फल (टिकोरा) नहीं आते और आराम का बौर जलकर नष्ट हो जाता है।

बसंत ऋतु के बाद आम के पेड़ों में बौर आना शुरू हो गया है, इसलिए बागवानों को अच्छा उत्पादन लेने के लिए आम के पेड़ों में बौर आते ही उसकी देखभाल शुरू कर देनी चाहिए। आम की डालों के पत्तों के बीच से निकलता बौर बहुत कोमल होता है, जिसके कारण आम के बौरों पर कीट धावा बोलकर उसे नुकसान पहुंचाते हैं।

बौरों में लगे कीटों से ऐसे करें बचाव
कमला नेहरू कृषि संस्थान के कृषि वैज्ञानिक चंद्रकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिस समय आम के पेड़ों में बौर लग (खिल) रहा हो, उस समय किसी भी कीट नाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि आम के बौरों का परागण मधुमख्यियों और हवा से होता है। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव मधुमख्यियों के मर जाने का कारण बनता है और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव से बनी नमी के कारण परागण नहीं हो पाता। मांहो के आकार के भुनगा और अन्य कीट पत्तियों और परागणों में चिपककर बौरों का रस चूसकर अधिक नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे आम के बौरों में फलों की संख्या में कमी हो जाती है।

बौरों पर इन कीटनाशकों का करें छिड़काव
आम के बौरों पर आम तौर पर कीटों का प्रकोप जनवरी के अंतिम सप्ताह और फरवरी के महीने में शुरू हो जाता है। कृषि वैज्ञानिक चंद्रकांत त्रिपाठी ने बताया कि इन कीटों से बचने के लिए बवेरिया, बेसियाना, फंफूद 5 ग्राम या नीम का तेल एक से दो लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से आम के बौरों को इस कीटों से बचाया जा सकता है। त्रिपाठी ने बताया कि अक्सर देखा गया है कि आम के पेड़ों में आये बौरों में गुच्छा रोग अधिक मात्रा में देखने को मिलता है। इस गुच्छों से आम के बौरों के फूलों में नपुंसकता आ जाती है। इसके प्रभाव से बचाने के लिए आम के पेड़ों में आये गुच्छों को डालों से तोड़कर दूर फेंक देना चाहिए। इससे अन्य बौर में बीमारी फैलने का डर नहीं रहता और आम का उत्पादन बढ़ जाता है।

Hariom Dwivedi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned