मवेशी चराने जा रहे ग्रामीण का हाथी से हो गया सामना, पहले जमीन पर पटका फिर पैरों से कुचलकर मार डाला

Elephant killed villager: प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में नहीं थम रहा हाथियों का उत्पात, हाथियों (Elephants) से ग्रामीणों को बचाने वन विभाग (Forest department) द्वारा नहीं की जा रही कोई सार्थक पहल

By: rampravesh vishwakarma

Published: 24 Nov 2020, 10:15 PM IST

प्रतापपुर. सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में हाथियों का उत्पात (Elephants orgy) थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को प्रतापपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत दुरती के खदरा जंगल के समीप मवेशी चराने जा रहे एक वृद्ध को हाथी ने कुचलकर मार (Killed villager) डाला। प्रतापपुर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया है।


ग्राम दुरती निवासी 60 वर्षीय सूरत लाल यादव हमेशा की तरह मंगलवार की सुबह लगभग 5 बजे मवेशियों को चराने खदरा जंगल की ओर जा रहा था। इसी दौरान उसका सामना एक हाथी से हो गया।

वह भाग पाता कि इससे पहले ही हाथी ने उसे सूंड़ से उठाकर पटक दिया, फिर पैर से सीने को कुचल दिया, इससे उसकी मौके पर ही मौत (Death in elephant attack) हो गई। घटना की सूचना पर वन कर्मी व प्रतापपुर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का पीएम कराकर परिजन को सौंप दिया।

वहीं वन विभाग द्वारा मृतक के परिजन को तात्कालिक सहायता राशि के रूप में 25 हजार रुपए दिए। वन परिक्षेत्र प्रतापपुर एवं आसपास का इलाका पिछले कई सालों से हाथियों के आतंक से जूझ रहा है।

बावजूद इसके प्रशासन एवं वन विभाग (Forest department) द्वारा कोई सार्थक पहल नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन एवं विभाग के प्रति रोष है।


प्रतिवर्ष लाखों की फसल होती है बर्बाद
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों द्वारा प्रत्येक वर्ष लाखों रुपए की फसल बर्बाद कर दी जाती है। लेकिन हाथियों के आतंक से निजात दिलाने वन विभाग की कोई भी योजना कारगर नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग सिर्फ हाथी भगाने के नाम पर खानापूर्ति करता है और जिस समय हाथी नुकसान पहुंचाता है उस समय वन कर्मियों सूचना देने पर भी मुआयना के लिए नहीं आते।


हाथियों ने रौंदी फसल, नहीं पहुंचे वन अधिकारी
मसगा के ग्रामीणों ने बताया कि इसी हाथी ने पिछले दिनों पूरी रात किसानों के खेत मे लगे खड़ी फसलों को रौंद (Elephants crushed crops) दिया। सूचना व जानकारी के बावजूद भी अभी तक वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा मौके पर आकर क्षतिपूर्ति नहीं बनाई गई है जिससे ग्रामीणों में विभाग के प्रति रोष व्याप्त है।

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