हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के इस अभ्यारण्य में हो रहे अवैध काम पर की सख्ती, सीएफ-डीडी से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के इस अभ्यारण्य में हो रहे अवैध काम पर की सख्ती, सीएफ-डीडी से मांगा जवाब

Ram Prawesh Wishwakarma | Publish: Aug, 10 2018 01:26:33 PM (IST) Surajpur, Chhattisgarh, India

हाईकोर्ट द्वारा जारी नोटिस में आगे की कार्रवाई होने तक अभ्यारण्य क्षेत्र में हो रहे इस काम पर लगाया रोक

पोड़ी मोड़/प्रतापपुर. तमोर पिंगला में पेड़ों के अवैध कटाई और लकड़ी की तस्करी के मामले में शासन-प्रशासन द्वारा जांच और कार्रवाई नहीं किये जाने के बाद हाईकोर्ट बिलासपुर में दायर याचिका में मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ सरगुजा और उपनिदेशक एलिफेंट रिजर्व अम्बिकापुर से दो हफ्ते में जवाब मांगा गया है।

न्यायालय से जारी नोटिस में आगे की कार्रवाई होने तक तमोर पिंगला क्षेत्र में कोई भी पेड़ न काटे जाने की सख्त हिदायत दी गई है। मामले में याचिका प्रतापपुर के चन्द्रिका प्रसाद कुशवाहा, राकेश मित्तल और कंवल साय की तरफ से अधिवक्ता रजनी सोरेन ने दायर की है।


गौरतलब है कि वाइल्ड लाइफ सरगुजा द्वारा तमोर पिंगला अभ्यारण्य और सूरजपुर वनमण्डल के घुई रेंज में करोड़ों की लागत से रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। इसका निर्माण वाइल्ड लाइफ के साथ उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा और तमोर पिंगला अभ्यारण्य की देख-रेख में हो रहा है।

 

Tree cutting

निर्माण क्षेत्र तमोर पिंगला और घुई में अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारियों द्वारा नियमों को ताक में रख बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया था, जबकि अभ्यारण्य क्षेत्र में किसी भी स्थिति में पेड़ों की कटाई नहीं की जा सकती। काटने की तो बात दूर वहां स्वत: गिरे हुए पेड़ों को उठाने की अनुमति नहीं होती क्योंकि इनमें छोटे जीव जंतु पैदा होते हैं जो वन्य प्राणियों के काम आते हैं।

बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने के साथ अधिकारियों ने तमोर पिंगला कार्यालय रमकोला में आरा और मजदूर लगा बेधड़क इनकी चिराई करा पटरा और चौखट बनवाया था ताकि इन्हें बाहर बेच सकें। उक्त मामला सामने आने के बाद अभ्यारण्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विभागीय संलिप्तता से लकड़ी तस्करी की बातें भी सामने आईं थी।

मामला खुलने के बाद विभाग में ह?कम्प मच गया था क्योंकि दूरस्थ होने का फायदा उठाकर विभागीय लोग अब तक बिना किसी रोक-टोक के तस्करी में लगे हुए थे। इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई हो जानी थी, लेकिन कार्रवाई की बजाय विभाग मामले को दबाने में लग गया था।


धूल खा रहा जांच प्रतिवेदन
मामले की शिकायत हुई थी, लेकिन कोई जांच कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने रमकोला में चक्काजाम और कार्यालय का घेराव किया था। इसके बाद कलक्टर के निर्देश पर प्रतापपुर नायब तहसीलदार पड़वार ने मामले की जांच की और आरोपों को सही बताते हुए एसडीएम को प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया था, लेकिन जांच के बाद प्रतिवेदन कार्रवाई की बजाए अधिकारियों की आलमारी में धूल खा रहा है।


हाईकोर्ट में दाखिल की है याचिका
शासन-प्रशासन द्वारा इस गम्भीर मामले में कोई कार्रवाई न होने के बाद मामले में पूर्व में शिकायत करने वाले चन्द्रिका कुशवाहा, कंवल साय और आरटीआई कार्यकर्ता राकेश मित्तल ने अधिवक्ता रजनी सोरेन के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर की थी। इसमें अंधाधुंध लकड़ी कटाई के मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की थी।

प्रस्तुत याचिका में मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी और न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा ने याचिका स्वीकार करते हुए मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ सरगुजा और उप निदेशक एलिफेंट रिजर्व सरगुजा को नोटिस भेजते हुए दो हफ्ते में जवाब प्रस्तुत करने कहा है। साथ ही हाइकोर्ट के अगले निर्णय तक क्षेत्र में पेड़ों को न काटने की सख्त हिदायत दी है।

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