लॉकडाउन में भूख-प्यास से बेहाल मिले 5 मजदूर, कहा- यहां मरने से अच्छा है घर पर निकले दम, फिर यूपी के लिए निकल गए पैदल

Lockdown: सरगुजा के अजिरमा में शुरुआती लॉकडाउन में खाना तो मिला लेकिन बाद में सरपंच-सचिव ने नहीं दिया ध्यान, 2 दिन बिस्किट खाकर किया गुजारा, भटकते मिले तो सूरजपुर के जरही में राहत शिविर में रखा गया

By: rampravesh vishwakarma

Published: 18 Apr 2020, 12:17 PM IST

जरही. लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों व जिले से आए 631 मजदूरों को जिले के राहत शिविरों में रखकर उनका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। मजदूरों का दूसरे जिलों से आने का सिलसिला अभी भी जारी है। इसी कड़ी में जरही में 5 ऐसे मजदूर पहुंचे, जो भूख से बेहाल थे, उनका सब्र टूट रहा था।

लॉकडाउन में फंसने पर शुरुआती दिनों में तो सरगुजा के अजिरमा में उन्हें खाना नसीब हुआ, लेकिन बाद में सरपंच-सचिव द्वारा उनका ध्यान नहीं रखा गया, ऐसे में 2 दिन सिर्फ बिस्किट खाकर गुजारा करना पड़ा।

यह देख वे अजिरमा से पैदल ही उत्तरप्रदेश जाने निकले मजदूरों ने सोच लिया था कि यहां भूखे मरने से अच्छा अपने घर पहुंचकर जान निकल जाए। फिर जरही में इन्हें प्रशासनिक मदद मिली और सभी को राहत शिविर में लाकर भोजन व रहने की व्यवस्था की गई। अब लॉकडाउन तक इन्हें राहत शिविर में ही रखा जाएगा।


गौरतलब है कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु घोषित किए गए लॉकडाउन पार्ट 1 में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के मजदूरों के पलायन करने का नजारा देखने को मिला था। ऐसे में अविभाजित सरगुजा में भी दूसरे राज्य व जिलों से मजदूर पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर का सफर करके पहुंचे थे।

भूख-प्यास से बेहाल इन मजदूरों की शासन-प्रशासन ने सुध ली। इसी कड़ी में सूरजपुर जिले में कुल 631 मजदूर विभिन्न राज्यों व जिलों से पहुंचे थे, जिन्हें राहत शिविरों में रखा गया है, यहां उन्हें भोजन सहित तमाम सुविधाएं प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है।

जरही में भी प्रशासन द्वारा एसईसीएल के सामूहिक व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र में राहत शिविर संचालित किया जा रहा है। यहां एसईसीएल द्वारा दूसरे राज्य व जिलों से आए लोगों के ठहरने व भोजन की व्यवस्था की गई है। शिविर में 50 बेड लगाए गए हैं।


भूखे भटक रहे थे मजदूर
लॉकडाउन पार्ट 2 की घोषणा के बाद भी दूसरे जिलों के मजदूरों का आना जारी है। इसी बीच सरगुजा जिले के अजिरमा से ५ मजदूर उत्तरप्रदेश जाने के लिए पैदल ही निकले थे, जरही पहुंचने के बाद उनकी स्थिति काफी खराब हो गई थी। वे भूखे-प्यासे भटक रहे थे, तभी कलक्टर दीपक सोनी को इसकी जानकारी मिली तो उन्हें राहत शिविर में लाया गया और उनके रहने व भोजन की व्यवस्था की गई।

कलक्टर के निर्देश पर अपर कलक्टर एसएन मोटवानी ने भी शिविर में पहुंचकर मजदूरों के लिए सारी व्यवस्था कराई। इससे पूर्व मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया।


अजिरमा में बिस्किट खाकर बिताए दो दिन
राहत शिविर में ठहराए गए मजदूर अमरजीत, रुपसाय, रामा, राजेश व राजकुमार ने बताया कि वे उत्तरप्रदेश के म्योपुर के निवासी हैं। मजदूरी करने के लिए अजिरमा आए थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण वे फंस गए व वापस यूपी नहीं जा सके। अजिरमा पंचायत के सरपंच-सचिव द्वारा शुरुआत में खाना दिया गया गया था, लेकिन बाद में मदद नहीं मिली।

लॉकडाउन पार्ट १ के खत्म होने से पहले दो दिन बिस्किट खाकर बिताने पड़े, इसके बाद जैसे ही लॉकडाउन कि तिथि बढ गई तो वे वहां से यह सोचकर निकल गए थे कि भूखे मरने से अच्छा है, घर पर जाकर जान निकले। मजदूरों ने बताया कि यहां प्रशासन से उन्हें पूरी मदद मिली, राहत शिविर में पूरी व्यवस्था मिलने से वे खुश हैं।

rampravesh vishwakarma Desk
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