बच्चों से भरी थी स्कूल बस और ड्राइवर ने की इतनी बड़ी लापरवाही, Video देखकर आ जाएगा गुस्सा

अन्य वाहनों के ड्राइवर कर रहे थे इंतजार लेकिन स्कूल बस के ड्राइवर ने लापरवाही की हद कर दी पार, बीच में लडख़ड़ा गई थी बस

By: rampravesh vishwakarma

Published: 24 Jul 2018, 08:17 PM IST

Ambikapur/केरता. माता-पिता अपने बच्चे को सुरक्षित स्कूल तक ले जाने तथा वहां से घर तक छोडऩे के लिए बस, ऑटो की सुविधा दिलाते हैं। इसके लिए वे स्कूल के वाहन या प्राइवेट वाहनों को किराये के रूप में मोटी रकम भी हर महीने अदा करते हैं। अभिभावकों की मंशा होती है कि भले ही पैसा लग जाए लेकिन बच्चे को सुविधा भी मिलेगी और सुरक्षित भी रहेगा।लेकिन यदि बस के ड्राइवर ही इतनी लापरवाही करने लगे कि बच्चों की जान पर खतरा बन आए तो इसे क्या कहा जा सकता है।

 

ऐसा ही नजारा सोमवार को अंबिकापुर-प्रतापपुर मार्ग पर केरता से पहले महान नदी पर बने रपटा पर देखने को मिला। मूसलाधार बारिश में रपटा पूरी तरह डूबा हुआ था। उक्त मार्ग से गुजरने वाले अन्य वाहन व यात्री पानी कम होने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच अंबिकापुर के मॉडर्न कान्वेंट स्कूल के ड्राइवर ने बच्चों से भरी स्कूल बस को रपटा में उतार दिया।

उसने करीब 20 बच्चों की जान जोखिम में डाली। रपटा पार करते समय बीच में बस लडख़ड़ाई भी। गनीमत रही कि कोई हादसा नहीं हुआ। इसी दौरान बस ड्राइवर की लापरवाही का वीडियो भी कई लोगों ने बनाया।


सूरजपुर जिले प्रतापपुर-अंबिकापुर मार्ग पर ग्राम केरता के पास महान नदी पर बने रपटे पर आए दिन ऊपर से पानी बहने से आवागमन ठप हो जा रहा है। इससे करीब दर्जन भर गांव के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार की सुबह भी रपटा पर ओव्हरफ्लो होने की वजह से आवागमन ठप हो गया।

कोल वाहनों सहित अन्य कई वाहनों की लंबी कतार लग गई। स्कूली शिक्षक, विद्यार्थी और शासकीय कर्मचारी रपटा पर पानी कम होने के इंतजार में घंटों फंसे रहे। इसी दौरान एक स्कूल बस चालक ने लापरवाहीपूर्वक बच्चों की जान खतरे में डाल रपटे को पार किया।


मना करने वाला कोई नहीं
सबसे बड़ी बात यह है कि रपटा के दोनों किनारे पुलिस जवानों की तैनाती भी नहीं की गई है ताकि लोगों को खतरे के बीच आने-जाने से रोका जा सके। बारिश से हर दिन ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है, लेकिन समस्या के निराकरण हेतु पहल नहीं की जा रही है। बीते वर्षों में यहां दो-तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद पुल निर्माण या फिर तात्कालिक व्यवस्था के रूप में मोटर बोट की भी सुविधा उपलब्ध नहीं की जा रही है।

rampravesh vishwakarma Desk
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