surat news : सालाना 5000 शिकायतें पुलिस को मिलती है कपड़े से जुड़ी धोखाधड़ी की

surat news : -कपड़ा बाजार में धोखेबाज और ले-भागू बड़े पैमाने पर सक्रिय

By: Dinesh M Trivedi

Published: 07 Jul 2019, 10:51 PM IST

दिनेश एम.त्रिवेदी
सूरत. शहर में रोजगार की रीढ़ माने जाने वाले कपड़ा बाजार में धोखेबाज और ले-भागू तत्व भी बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। यही वजह है कि पुलिस को कपड़े से जुड़ी धोखाधड़ी की सालाना करीब पांच हजार शिकायतें मिलती हैं। इनमें से करीब चार हजार लिखित शिकायतें तो अकेले सलाबतपुरा थाने को मिलती हैं। शेष महिधरपुरा, वराछा और पूणागाम थाने को मिलती हैं क्योंकि कपड़ा बाजार कुछ हिस्सा इन थानाक्षेत्रों में भी पड़ता है। इस हिसाब से देखे तो प्रतिदिन औसतन दस से पन्द्रह लिखित शिकायतें पुलिस तक पहुंचती हैं, लेकिन उनमें से फौजदारी बहुत कम मामलों में दर्ज होती हंै। सलाबतपुरा समेत इन चार थानों में सालाना कपड़े से जुड़ी धोखाधड़ी के डेढ़ सौ से दौ सौ फौजदारी मामले ही दर्ज हो पाते हंै। कुछ मामलों में लेनदार व देनदार के बीच समझौता हो जाता है तो शेष मामले कोर्ट पहुंचते हैं या फिर बिना निपटारे के ही रह जाते हैं।


दीवानी मामले भी होते हैं शामिल


पुलिस सूत्रों की माने तो इन शिकायतों में दीवानी मामले भी होते हंै। जो व्यापारिक लेनदेन से जुड़े होते हैं। ऐसे में शिकायत मिलने पर उसकी जांच की जाती है। दोनों पक्षों से पूछताछ की जाती है तथा भुगतान नहीं करने वाली पार्टी मंशा के बारे में पता किया जाता है कि व्यापारिक नुकसान की वजह से भुगतान नहीं कर पा रहा है या वह धोखाधड़ी का ही इरादा रखता है। उसके खिलाफ और भी व्यापारियों की शिकायतें है या नहीं। यदि और भी व्यापारियों की शिकायतें होती है। मामले की पड़ताल के बाद फौजदारी दर्ज कर कार्रवाई की जाती है। यदि पैमेंट का विवाद व्यापारिक होता है तो ऐसे मामलों के निपटारे के लिए उन्हें कोर्ट जाने की सलाह दी जाती है।


छोटे मोटे मामले में बिना निपटारे के ही रह जाते हंै


कई मामलों में लेनदेन कच्चा (बिना बिल) होने के कारण पीडि़त व्यापारियों के पास लेनदेन के बिल समेत पर्याप्त साक्ष्य नहीं होते हैं। ऐसे में उनके साथ धोखाधड़ी होती भी है तो वे कानूनी कार्रवाई नहीं कर पाते है। धोखाधड़ी की रकम छोटी हो तो भी व्यापारी थाने व कोर्ट के चक्कर लगाने से बचते हैं और कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। इस वजह से धोखेबाजों व ले-भागू तत्वों को बढ़ावा मिलता है। वे अन्य व्यापारियों के साथ भी इसी तरह से धोखाधड़ी करते है।


वर्जन
अकेले सलाबतपुरा थाने में सालाना चार से पांच हजार लिखित शिकायतें मिलती है। इनमें दीवानी लेनदेन भी होता है। ऐसे में जांच के बाद जिन मामलों में फौजदारी बनती है। उन्हीं की प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाती है।
वी.जे.चौधरी,थाना प्रभारी, सलाबतपुरा

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Dinesh M Trivedi Reporting
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