सूरत में म्यूकॉरमाइकोसिस के 9 पॉजिटिव और 10 संदिग्ध भर्ती, अस्पताल ने सरकार से मांगे 2000 इंजेक्शन

- न्यू सिविल अस्पताल अधीक्षक ने राज्य सरकार को इंजेक्शन की आपूर्ति के लिए भेजा आवेदन

- मृत्युदर अधिक होने से म्यूकॉरमाइकोसिस के मरीजों में दहशत, सभी मरीज प्राइवेट अस्पताल हुए रेफर

By: Sanjeev Kumar Singh

Updated: 11 May 2021, 10:23 PM IST

सूरत.

शहर में कोरोना की दूसरी लहर कमजोर होती दिखाई दे रही है, तो म्यूकॉरमाइकोसिस ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। न्यू सिविल अस्पताल में म्यूकॉरमाइकोसिस के नौ पॉजिटिव और 10 संदिग्ध समेत 19 मरीजों का इलाज हो रहा है। म्यूकॉरमाइकोसिस के लिए जे-3 वार्ड, ऑपरेशन थियेटर तैयार किया गया है, लेकिन मरीजों के लिए जरुरी इंजेक्शन की कमी हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने म्यूकॉरमाइकोसिस के मरीजों के लिए राज्य सरकार से 2000 इंजेक्शन की मांग की है।

शहर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार पिछले कुछ दिनों से घट रही है, वहीं अब म्यूकॉरमाइकोसिस बीमारी ने कोरोना संक्रमित मरीजों की चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय से डायबिटिज से पीडि़त और कोरोना संक्रमित मरीजों को ब्लैक फंगस का डर सताने लगा है। सूरत के निजी अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में निजी अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों में म्यूकॉरमाइकोसिस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक डेढ़ सौ से अधिक मरीज सूरत में होने की आशंका जताई जा रही है।

म्यूकॉराइकोसिस के मरीजों की संख्या बढऩे पर उन्हें न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती करने के लिए जे-3 वार्ड तैयार किया है। इस वार्ड में अब तक 19 म्यूकॉरमाइकोसिस के मरीज उपचार ले रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि इसमें नौ मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जबकि अन्य 10 मरीजों की रिपोर्ट अभी आनी है। चिकित्सकों ने बताया कि गंभीर मरीजों को महंगे इंजेक्शन की जरुरत होती है, लेकिन इंजेक्शन की शॉर्टेज चल रही है। न्यू सिविल अस्पताल अधीक्षक डॉ. रागिनी वर्मा ने बताया कि म्यूकॉरमाइकोसिस के लिए जे-3 वार्ड, ऑपरेशन थियेटर और डॉक्टरों की टीम तैनात की है।

म्यूकॉरमाइकोसिस के लिए जरुरी लाइपोसोमल एम्फोटेरोसिस-बी इंजेक्शन 2000 की डिमांड गांधीनगर भेजी गई है। इस इंजेक्शन की बाजार कीमत 4000 से 7500 रु है। एक म्यूकॉरमाइकोसिस मरीज को अधिक संख्या में इस इंजेक्शन के डोज देने की जरुरत होती है। मरीजों की संख्या बढऩे के चलते अस्पताल के मेडिकल स्टोर से राज्य सरकार को जानाकरी देकर इंजेक्शन की आपूर्ति करने की मांग की है।

प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों में केस बढ़े

सूरत में म्यूकॉरमाइकोसिस के मरीजों से दहशत व्याप्त हो गई है। चिकित्सकों ने बताया कि लंबे समय से डायबिटीज से पीडि़त मरीजों में कोरोना संक्रमण के बाद उसे स्वस्थ करने के लिए स्टेरॉइड का उपयोग किया जाता है। इसमें से ही कुछ मरीजों में म्यूकॉरमाइकोसिस के लक्षण देखने को मिल रहे है। अब तक जो भी मरीज सामने आए है वह सभी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। म्यूकॉरमाइकोसिस के लक्षण दिखाई देने के बाद निजी अस्पताल से उन्हें न्यू सिविल के लिए रेफर किया जा रहा है। म्यूकॉरमाइकोसिस का इलाज काफी महंगा होने के कारण आम आदमी के लिए इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।

सिविल के कोरोना मरीजों में नहीं दिखे लक्षण

न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को स्टेरॉइड देने के पहले डॉक्टर को कोर कमेटी से अनुमती लेना जरुरी है। इस कोर कमेटी में मेडिसिन, एनेस्थेसिया, टीबी चेस्ट विभाग के डॉक्टर गाइडलाइन के मुताबिक निर्धारित करते हैं कि किस मरीज को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन डोज देना है। न्यू सिविल अस्पताल की बात करें तो जनवरी अब तक 7800 कोरोना मरीजों का इलाज किया गया है। अब तक किसी भी कोरोना संक्रमित मरीज में म्यूकॉरमाइकोसिस के लक्षण या बीमारी दिखाई नहीं दिया है।

कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों में ब्लड शुगर की निगरानी जरुरी

चिकित्सकों ने ब ताया कि आइसीएमआर की गाइडलाइंस में डायबिटीज और कमजोर इम्यूनिटी वाले कोविड-19 मरीजों के नाक में सूजन, चेहर के एक ओर दर्द, नाक की रेखा पर कालापान, दर्द के साथ धुंधला दिखाई देना, सीने में दर्द, स्किन में बदलाव और सांस लेने में समस्या होने पर म्यूकोरमाइकोसिस का संदिग्ध मामला हो सकता है। आईसीएमआर-स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बीमारी का सबसे बड़ा खतरा, डायबिटिज अनियंत्रित होना, स्टीरॉइड की वजह से इम्यूनिटी में कमी, लंबे समय तक आईसीयू में रहने वाले केस में है। इस बीमारी से बचने के लिए कोविड-19 मरीज को छुट्टी देने के बाद भी ब्लड शुगर की निगरानी की जानी चाहिए। स्टेरॉइड का सही मात्रा में और सही समय पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ऑक्सीजन पद्धति के दौरान नमी के लिए साफ और संक्रमणमुक्त पानी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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