कोविड-19 हॉस्पिटल के एक दर्जन मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव

सूरत में मरीजों के इलाज के लिए कोरोना वॉरियर्स ने एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया...

पिछले दो-ढाई माह में डेढ़ दर्जन से अधिक डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य मेडिकल स्टाफ हुए बीमार

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 14 Jun 2020, 06:55 PM IST

सूरत.

न्यू सिविल अस्पताल के कोडिव-19 हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी निभाने वाली मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष बुधवार को कोरोना पॉजिटिव आ गई। पिछले एक सप्ताह में कोविड-19 हॉस्पिटल तथा आईसीयू में काम करने वाले डेढ़ दर्जन से अधिक डॉक्टर, नर्सिंग समेत अन्य मेडिकल स्टाफ अपचाराधीन है। अब तक सूरत में कोरोना मरीजों की रिकवरी दर देश में सर्वाधिक 64 फिसदी के आसपास बरकार है, जो कुछ दिन पहले तक 70 फिसदी तक पहुंच गई थी, इसका श्रेय भी मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों व स्टाफ को ही जाता है।


सूरत में अनलॉक- 1.0 के दौरान कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक सप्ताह में प्रतिदिन 55 से 90 तक कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आए है। इसके साथ ही रोजोना दो से तीन मौतें भी दर्ज की जा रही है। शहर में मंगलवार को लिम्बायत और रांदेर जोन निवासी दो वृद्धों की मौत हो गई थी। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से 59 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले थे। लेकिन अब कोविड-19 हॉस्पिटल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर भी इससे बच नहीं पा रहे।
सूत्रों ने बताया कि न्यू सिविल अस्पताल के मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष की भी बुधवार को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। चिकित्सकों ने उन्हें कोविड-19 हॉस्पिटल में भर्ती कर उपचार शुरू किया है।

इसके अलावा न्यू सिविल अस्पताल के एक डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की हेड मेट्रन की भी मंगलवार को रिपोर्ट पॉजिटिव पॉजिटिव आई थी। इससे पहले भी मेडिसिन विभाग के दो रेजिडेंट, एनेस्थेसिया विभाग के एक रेजिडेंट, नर्सिंग स्टाफ की हेड नर्सिंग सुप्रिटेंडेंट समेत कुल बारह मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव आए थे और हाल में उपचाराधीन है। न्यू सिविल अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रीति कापडिय़ा ने पत्रिका को बताया कि पिछले दो-ढाई माह में डेढ़ दर्जन से अधिक डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य मेडिकल स्टाफ कोरोना पॉजिटिव आए हैं। सबसे पहले इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर, गर्भवती महिला के प्रसूति के दौरान ऑपरेशन में शामिल दो रेजिडेंट और तीन नर्सिंग स्टाफ समेत अन्य डॉक्टर भी पॉजिटिव आए थे।

मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष के कोरोना पॉजिटिव आने से स्वास्थ्य विभाग में हडक़म्प मच गया है। सूरत में पॉजिटिव मरीजों की रिकवरी रेट सबसे अधिक है। इसका श्रेय मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों को जाता है। सभी मेडिकल स्टाफ ने टीम वर्क कर सैकड़ों कोरोना मरीजों को स्वस्थ कर घर भेजा है। अब तक शहर में 2,238 पॉजिटिव मिले हैं। जिसमें 1419 को स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दी है।


सभी इन्टर्न और रेजिडेंट को कोविड-19 में नियुक्ति

कोविड-19 हॉस्पिटल में कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीजों को ठीक करने के लिए पूरे अस्पताल का स्टाफ टीम वर्क के साथ मरीजों की देखभाल में जुटा है। मेडिसिन विभाग के अलावा टीबी-चेस्ट, स्किन, ऑर्थोपेडिक, गायनेक, ऑप्थॉलमोलॉजी, ईएनटी समेत अलग-अलग विभागों के रेजिडेंट डॉक्टर को कोविड-19 हॉस्पिटल में बारी-बारी से ड्यूटी दी जा रही है। यहां तक एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले इन्टर्न को भी रोटेशन से अलग-अलग वार्डो में नियुक्त किया जा रहा है। सूरत में पहला मरीज 19 मार्च को पॉजिटिव आया था और तभी से इमरजेंसी ड्यूटी घोषित हो गई थी। लेकिन कुछ दिन पहले इन्टर्न और रेजिडेंट चिकित्सकों की मांग पर उन्हें कुछ दिनों का ब्रेक देने का सिस्टम शुरू किया है। अभी भी मेडिकल फैकल्टी को ढाई माह से एक दिन भी अवकाश नहीं दिया गया है।

कॉन्ट्र्रेक्ट पर नौकरी में लोगों को रुचि नहीं

न्यू सिविल अस्पताल में 72 घंटे में तैयार कोविड-19 हॉस्पिटल के लिए अखबार में मेडिकल स्टाफ की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें स्पेश्यिालिस्ट पलमोनोलॉजिस्ट 10, वेतन 1.20 लाख, स्पेश्यिालिस्ट एनेस्थेटिस्ट 5, वेतन 1.20 लाख, मेडिकल ऑफिसर 20, वेतन 60 हजार, नर्सिंग स्टाफ 250, वेतन 13 हजार और चपरासी 50 वेतन 9 हजार समेत अन्य जगहों के लिए भर्ती का आयोजन किया गया। इसमें सेवानिवृत्त डॉक्टरों को भी आमंत्रित किया गया था। सूत्रों ने बताया कि कोविड-19 हॉस्पिटल में काम करने के लिए बहुत कम लोगों ने रुचि दिखाई है। अब तक दस से भी कम लोगों की भर्ती हुई है। इसमें तीन मेडिकल ऑफिसर, चार डाटा ऑपरेटर शामिल है। विशेषज्ञ डॉक्टर एक भी इंटरव्यू देने के लिए नहीं पहुंचा है। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भी कॉन्ट्रेक्ट बेसीस पर भर्ती निकाली गई है लेकिन वहां की भी स्थिति सूरत जैसी ही है।

एक्सपर्ट व्यू- लॉंग टर्म मेडिकल व्यवस्था के लिए सोचना जरूरी

कोविड-19 हॉस्पिटल में काम करने वाले चिकित्सक ने बताया कि देश में कोरोना वायरस आ गया है और उसकी चेन अब तक टूट नहीं सकी है। सूरत में कोरोना मरीजों को सबसे अधिक न्यू सिविल अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। परिणाम भी अच्छा आया जो कि रिकवरी रेट अच्छे होने से पता चलता है। लेकिन आखिर कब तक न्यू सिविल अस्पताल के डॉक्टर कोरोना मरीजों का इलाज करते रहेंगे। नैतिक जिम्मेदारी के साथ निजी अस्पताल खुलने लगे है और कुछ अस्पताल कोरोना मरीजों का इलाज भी कर रहे है। लेकिन शहर के ज्यादातर अस्पताल को महामारी के दौरान कोरोना मरीजों के इलाज में योगगदान देना होगा। न्यू सिविल अस्पताल के मेडिसिन विभाग में कुल 24 फैकल्टी पद है लेकिन हाल में सिर्फ दस लोग ही कार्यरत है। ग्यारह माह के कॉन्ट्रेक्ट पर भर्ती निकाली जिसमें कोई रुचि नहीं ले रहा है। कोरोना को भगाने के लिए लॉन्ग टर्म का विचार करते हुए चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरुरत है। सरकारी अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को निजी अस्पताल के मरीजों के ट्रेनिंग में लगाकर मैनपावर बढ़ाने पर फोकस करने की आवश्यकता है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में रिक्त पदों को भरने के लिए स्थाई नियुक्ति पर सरकार को सोचना चाहिए।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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