पिता की क्रूरता से कैसे बचा चौदह साल का किशोर ?

पिता की क्रूरता से कैसे बचा चौदह साल का किशोर ?

Dinesh M.Trivedi | Publish: Aug, 08 2019 10:12:39 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

- निद्राधीन परिवार पर किया तेजाब से हमला
- पत्नी व तीन बच्चे बुरी तरह से झूलसे
- शराब पीने को लेकर था विवाद

सूरत. वराछा थानाक्षेत्र की हरिधाम सोसायटी में एक व्यक्ति द्वारा अपने ही परिवार पर किए गए एसिड अटैक में उसका चौदह वर्षीय पुत्र तरुण सकुशल बच गया। उस पर उसने तेजाब नहीं फेंका था। बताया जाता है कि तरुण अपने पिता छगन वाला के साथ पलंग पर सोया था। जबकि उसकी माता हंसा, बड़ी बहन प्रवीणा, छोटी बहन अल्पा एवं भाई भार्गव फर्श पर एक कतार में सो रहे थे।
गुरुवार तडक़े करीब तीन बजे छगन उठा। उसने तेजाब की बोतल उठाई और उसका ढक्कन खोल कर कतार में सो रहे चारों के शरीर के ऊपरी हिस्से पर तेजाब फेंक दिया। उसने पलंग पर सो रहे तरुण पर तेजाब नहीं डाला। चीख पुकार मचने पर वह भाग निकला। लोगों ने चारों को स्मीमेर अस्पताल में पहुंचाया।


हंसा की हालत गंभीर
अस्पताल सूत्रों के अनुसार हंसा की हालत गंभीर बताई है। उसका चेहरा, दोनों हाथ, छाती का हिस्सा का बुरी तरह से झुलस चुका है। वह बोल भी नहीं पा रही है। वहीं प्रवीणा, अल्पा व भार्गव खतरे से बाहर हैं। हालांकि उनका भी चेहरा व छाती का हिस्सा बुरी तरह से झुलसा हुआ है। चारों का उपचार चल रहा है।


शराब की लत मुख्य वजह
परिचितों ने बताया कि गिर सोमनाथ जिले के बेडिया गांव के मूल निवासी छगन की गोड़ादरा क्षेत्र में धागों की दुकान है, लेकिन शराब की लत के कारण वह दुकान पर नहीं जाता था। आमदनी नहीं होने के कारण शराब के लिए पत्नी से रुपए मांगता था। इसे लेकर हंसा के साथ अक्सर झगड़ा होता था।


डॉक्टर पुत्र और पुत्रियां डालती थी दबाव
छगन का पुत्र भार्गव स्मीमेर मेडिकल कॉलेज में ही एमबीबीएस का छात्र है। उसकी पढ़ाई का खर्च वहन करने के लिए भी उन्हें परिजनों की मदद लेनी पड़ी थी। पुत्र भार्गव तथा पुत्रियां प्रवीणा और अल्पा भी शराब छोडऩे के लिए उस पर दबाव डालती थी।


नियोजित ढंग से हमले की आशंका
मामले की जांच कर रहे वराछा थाना प्रभारी एम.पी.पटेल ने बताया कि प्रथमदृष्टया हमले में टॉयलेट साफ करने वाले तेजाब के उपयोग की आशंका है। हालांकि फोरेन्सिक टीम से इसकी जांच करवाई जा रही है। पूछताछ में पता चला है कि बुधवार को कोई विवाद नहीं हुआ था तथा उनके घर में तेजाब नहीं था। छगन उनसे छिपाकर तेजाब की बोतल लाया था। रात का खाना खाने के बाद सो गए तो तीन बजे उसने बोतल निकाली और डाल दिया।

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