गर्भ में बच्चे की मौत के बाद 16 यूनिट रक्त चढ़ाकर बचाया

- स्मीमेर अस्पताल में गायनेक और एनेस्थेसिया चिकित्सकों ने मल्टी डिसिप्लिनरी टीमवर्क से दिया नया जीवन

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 19 Apr 2021, 10:29 PM IST

सूरत.

पलसाणा चलथाण गाम निवासी महिला शादी के 12 वर्ष बाद गर्भवती हुई और 7 अप्रेल को रुटीन जांच के दौरान सोनोग्राफी रिपोर्ट में पता चला कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। महिला के शरीर में रक्त 5 प्रतिशत से कम था और ऑपरेशन जरूरी था। निजी अस्पताल से महिला को स्मीमेर अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों ने 16 यूनिट रक्त चढ़ाकर उसे ऑपरेशन थियेटर में लिया और वेंटिलेटर पर इलाज कर उसकी जिंदगी बचाई।

गायनेक विभाग के अध्यक्ष और प्रोफेसर डॉ. अश्विन वाछाणी ने बताया कि सात अप्रेल को गर्भवती महिला रेखा रविन्द्र राजपूत को स्मीमेर अस्पताल में भर्ती किया गया था। उसकी हालत बहुत गंभीर थी और शरीर में रक्त का प्रमाण 5 प्रतिशत से भी कम था। मेलिनो का भाग गर्भाशय से अलग हो गया था। उसे मेडिकल भाषा में एब्रुपशन प्लेजेंटा कहा जाता है। इसके चलते मासिक के रास्ते से खूब रक्त बह जाता था। इसी परिस्थिति में मरीज में रक्त के जमने की प्रक्रिया भी काफी धीमी हो गई थी। रेखा को 16 यूनिट रक्त चढ़ाया और ऑपरेशन कर जिंदगी बचाई गई।

एनेस्थेटिस्ट विभाग की डॉ. भावना सोनी ने बताया कि महिला के शरीर में रक्त घटता जा रहा था। ऑपरेशन के दौरान उसके दिल की धडक़न बढ़ गई थी। वहीं, रक्त का प्रेशर कम हो गया था। इसके चलते उसे वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। तीन दिन तक स्मीमेर अस्पताल के गायनेक और एनेस्थेसिया विभाग के चिकित्सकों ने मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के रुप में टीमवर्क के साथ रेखा का इलाज किया और अब वह स्वस्थ हो गई है। रेखा को मौत के मुंह से बचाने के साथ-साथ उसके गर्भाश्य की थैली को बचाने में चिकित्सकों ने सफलता हासिल की है। इससे रेखा फिर से मां बन सकती है।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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