AKAL ABHIYAN: पहले चरण में गोशाला से लेंगे आठ लाख बिनदुधारु गाय

-8 हजार गांव के 100-100 घरों में जाएगी यह गायें और वनवासियों को मिलेगा गोमूत्र व गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण, गोपाष्टमी 22 नवम्बर को गोवर्धन तीर्थ क्षेत्र में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज व दीदीमां साध्वी ऋतम्भरा के सानिध्य में होगी शुरुआत

-एकल अभियान की ग्रो-ग्राम योजना से देश की विभिन्न गोशाला का बचेगा प्रतिदिन 4 करोड़ के हिसाब से साल का करीब 1500 करोड़ खर्च, गो-ग्राम योजना में एक करोड़ गायें लेने का है लक्ष्य

By: Dinesh Bhardwaj

Published: 13 Nov 2020, 05:44 PM IST

सूरत. गाय बिकेगी नहीं तो कटेगी भी नहीं...सूत्र को सही मायने में सार्थक बनाने की दिशा में देशव्यापी बड़ी पहल एकल अभियान ने गो-ग्राम योजना के माध्यम से करने की ठानी है। योजना के प्राथमिक चरण में देश की विभिन्न गोशाला से बिनदुधारु 8 लाख गायों को दान लेकर उन्हें वनवासी बहुल झारखंड के 8 हजार गांवों 8 लाख घरों में वनवासियों तक पहुंचाया जाएगा। जहां पर गाय और गो-पालक वनवासी दोनों आत्मनिर्भर बनेंगे और इसका प्रशिक्षण उन्हें एकल अभियान द्वारा गांव-गांव संचालित एकल विद्यालय में दिया जाएगा। योजना की शुरुआत गोपाष्टमी के अवसर पर 22 नवम्बर को गोवर्धन तीर्थ क्षेत्र में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास महाराज व दीदीमां साध्वी ऋतम्भरा के सानिध्य में की जाएगी।
गाय भारतीय सनातन संस्कृति का मूलाधार है और इसकी पीड़ा को योजनाबद्ध तरीके से दूर करने के उद्देश्य से एकल अभियान ने गो-ग्राम योजना बनाई है। इस योजना का शुभारम्भ गोपाष्टमी के पावन अवसर पर 22 नवम्बर को गोवर्धन तीर्थ क्षेत्र में 60 गायों की वैदिक विधि से पूजन के साथ किया जाएगा। इसके बाद अगले वर्ष अप्रेल से गो-ग्राम योजना का प्राथमिक चरण देश के वनवासी बहुल झारखंड राज्य में शुरू होगा और वहां पर 8 हजार गांवों के सौ-सौ घरों में एक-एक गाय अर्थात आठ लाख गायें दी जाएगी। यह सभी गायें बिनदुधारु होगी और इन्हें संभव हो सकेगा वहां तक झारखंड की ही विभिन्न गोशाला से योजना के तहत दान में ग्रहण किया जाएगा। जिन गायों को गोशाला में आर्थिक बोझ के समान समझा जाता है वो ही गायें गो-ग्राम योजना के तहत गो-पालक वनवासी के घर पहुंचकर स्वयं और गो-पालक को आत्मनिर्भर बनाएगी। एकल अभियान ने बिनदुधारु गाय और वनवासी गो-पालक दोनों को आत्मनिर्भर बनाने की पूरी योजना पहले ही तैयार कर ली है।

यूं बनेंगे दोनों आत्मनिर्भर

गो-ग्राम योजना का प्राथमिक चरण अगले वर्ष अप्रेल से शुरू होगा और इससे पहले योजना के लिए चिह्नित झारखंड राज्य के वनवासी बहुल आठ हजार गांवों में एकल अभियान द्वारा संचालित एकल विद्यालय वनवासी गो-पालकों को गोमूत्र व गोबर से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दीपावली करोड़ों की संख्या में गोबर के दीये बिके है। इसके अलावा गोमूत्र का फिनाइल, खेतों में कीटनाशक समेत अन्य उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण प्राथमिक चरण में झारखंड के 8 हजार गांव के 8 लाख वनवासी गो-पालकों को दिया जाएगा। वनवासी गो-पालकों द्वारा तैयार गोमूत्र व गोबर के उत्पाद को प्राथमिक स्तर पर क्रय करने की व्यवस्था भी एकल अभियान की ओर से की जाएगी, जिन्हें बाद में देश के शहर-शहर में पहुंचाया जाएगा।

गोशाला का बचेगा सालाना अरबों रुपया

गोपाष्टमी से प्रारम्भ हो रही एकल अभियान की गो-ग्राम योजना के प्राथमिक चरण में देश के झारखंड राज्य को शामिल किया गया है और यहां की हजारों गोशाला में आश्रित बिनदुधारु 8 लाख गायों को राज्य के ही 8 हजार गांव के 8 लाख प्रशिक्षित वनवासी गो-पालकों के घर दोनों के आत्मनिर्भर बनने के लिए भेजा जाएगा। इस योजना से अकेले झारखंड राज्य की हजारों गोशाला का सालाना 1500 करोड़ रुपए का खर्चा बच जाएगा। योजना के मुताबिक बिनदुधारु गाय कम चारा खाती है, लेकिन फिर भी उस पर औसत 50 रुपए के प्रतिदिन खर्च के हिसाब से 8 लाख बिनदुधारु गाय का एक दिन का खर्चा 4 करोड़ होता है और साल में यह आंकड़ा 14 अरब 60 करोड़ तक पहुंचता है। बिनदुधारु गायों के गोशाला से जाने के साथ ही यह खर्चा शुद्ध रूप से बच जाएगा।

एक करोड़ गाय दान लेने का है लक्ष्य

अगले वर्ष अप्रेल में गो-ग्राम योजना के तहत झारखंड राज्य के 8 हजार गांवों में 8 लाख प्रशिक्षित वनवासी गो-पालकों तक गाय पहुंचाई जाएगी। इसके तत्काल बाद एकल अभियान की ओर से देश के अन्य वनवासी बहुल प्रदेश में इस योजना को साकार रूप देने की तैयारियां पूरी कर ली जाएगी। एकल अभियान के द्वारा देश के अधिकांश राज्यों के वनवासी बहुल अंचल के गांवों में एक लाख से ज्यादा एकल विद्यालय संचालित है, जो कि वनवासी गो-पालकों को गोमूत्र व गोबर से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देंगे। एकल अभियान गो-ग्राम योजना के तहत एक करोड़ गायों को प्रशिक्षित वनवासी गो-पालकों के घर पहुंचाने की तैयारी के साथ इस वृहद् योजना पर कार्य कर रहा है।

सनातन संस्कृति की प्रतिमूर्ति


गोमाता में भारतीय सनातन संस्कृति के दर्शन होते हैं और यह सुरक्षित व संरक्षित है तो भारतीय सनातन संस्कृति सुरक्षित व संरक्षित है। इसी उद्देश्य के साथ गोपाष्टमी के अवसर पर संतों के सानिध्य में गोवर्धन तीर्थ क्षेत्र में गो-ग्राम योजना की शुरुआत की जाएगी।
श्याम गुप्त, संस्थापक, एकल अभियान

सभी तैयारियां पहले होगी पूरी

गोशाला से बिनदुधारु गायें गो-ग्राम योजना के तहत दान के रूप में एकल अभियान की ओर से ग्रहण कर वनवासी गो-पालकों के घर पहुंचाई जाएगी। गाय के घर पहुंचने से पहले तक योजना की सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएगी।
महेश मित्तल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, श्रीहरि सत्संग समिति

गो-ग्राम योजना लाएगी गो-क्रांति

वनवासी समाज के लिए सदैव तत्पर एकल अभियान की गो-ग्राम योजना निसंदेह देशभर में गो-क्रांति लाएगी। हजारों गोशाला का करोड़ों-अरबों रुपया खर्च होने से बचेगा तो निश्चय ही वह धनराशि गोमाता की सेवा में अन्य सद्कार्य में उपयोग ली जा सकेगी।
अरुण पाटोदिया, अध्यक्ष, श्रीसोमोलाई हनुमान गोशाला, सूरत-कामरेज

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Dinesh Bhardwaj Reporting
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